
24 जून 2026 को बाज़ार ने एक बार फिर Investors को चौंकाया। Nifty 50 जो सुबह 24,074 के आसपास खुला था वो धीरे धीरे फिसलता रहा और 23,953 के आसपास 0.62% की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। Rupee भी 94.6 से 94.7 के दायरे में कमज़ोर बना रहा। ऊपर से global markets से भी कोई ख़ास राहत नहीं मिली। कुल मिलाकर 24 जून का दिन बाज़ार के लिए आसान नहीं रहा।
आज बाज़ार में हुआ क्या?
Nifty 50 सुबह 24,074 के आसपास खुला लेकिन 24,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर एक अहम support बना हुआ है। Technical नज़रिए से 24,200 एक मज़बूत resistance है और जब तक यह टूटता नहीं तब तक तेज़ी की पुष्टि नहीं होगी। Crude oil 72 से 73 प्रति barrel के आसपास मँडरा रहा है जो चार महीने के निचले स्तर के करीब है।
मेरे हिसाब से आज की गिरावट अचानक नहीं आई। पिछले कुछ sessions में जो तेज़ी आई थी उसके बाद profit booking होना स्वाभाविक था। IT और metal sector पर दबाव पहले से बन रहा था।
Iran-US negotiations का बाज़ार पर क्या असर?
US-Iran शांति वार्ता आगे बढ़ रही है और रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले दो महीनों में एक लंबे समय का समझौता हो सकता है। इससे Middle East से energy exports बिना रुकावट के जारी रह सकते हैं। Gulf में फँसे oil tankers का Strait of Hormuz से गुज़रना शुरू होने से crude की कीमतें नीचे आई हैं।
भारत के लिए सस्ता crude हमेशा अच्छी खबर होती है क्योंकि हम अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से मँगाते हैं। इससे inflation का दबाव कम होता है और Rupee को भी थोड़ी राहत मिलती है। लेकिन यह राहत पूरी तरह तब काम करती है जब global sentiment भी साथ हो।
Rupee 94.7 पर — कितना बड़ा ख़तरा?
Rupee अभी 94.6 से 94.7 के दायरे में है और global currency movements से थोड़ा दबाव बना हुआ है। Rupee का कमज़ोर होना कई मोर्चों पर असर डालता है। Import महँगा होता है, companies की विदेशी देनदारी बढ़ती है और Foreign Portfolio Investors यानी FPIs को भी घाटा होता है जब वो अपना पैसा वापस ले जाते हैं।
RBI ने Rupee को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं और उनका असर भी दिख रहा है। लेकिन जब तक America में interest rates ऊँचे बने रहेंगे तब तक dollar मज़बूत रहेगा और Rupee पर दबाव बना रहेगा।
FPI और DII — कौन खरीद रहा है?
सोमवार को बाज़ार में tech stocks Mahindra और Infosys ने बढ़त दिखाई थी और financial companies जैसे HDFC Bank, Bajaj Finance में भी खरीदारी रही थी। लेकिन बड़ी तस्वीर देखें तो FPIs इस साल भारतीय बाज़ार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाल चुके हैं। यही वजह है कि हर तेज़ी पर बिकवाली का डर बना रहता है।
DII यानी घरेलू संस्थागत निवेशक इस बिकवाली को absorb करने में लगे हैं और उनकी खरीदारी ने बाज़ार को बड़ी गिरावट से बचाया है।
Technical तस्वीर क्या कहती है?
| Level | क्या है |
|---|---|
| 24,200 | तत्काल resistance |
| 24,000 | मज़बूत support |
| 23,900 | अगला support |
| 23,800 | बड़ा support zone |
अगर Nifty 24,000 से नीचे टूटा तो 23,900 और फिर 23,800 तक गिरावट आ सकती है। ऊपर की तरफ 24,200 को पार करना ज़रूरी है तब ही तेज़ी की पुष्टि होगी। RSI अभी 60 के आसपास है जो buying momentum की वापसी दिखाता है।
Crude सस्ता है तो भी चिंता क्यों?
यह सवाल हर कोई पूछ रहा है। Crude सस्ता होने से भारत को फायदा होता है यह तो सही है लेकिन America में Federal Reserve की सख्त नीति का असर emerging markets पर पड़ता है। जब America में ही अच्छा return मिले तो foreign investors का पैसा भारत से निकलकर वहाँ जाता है।
मान लो Surat का एक कपड़े का व्यापारी है जिसे देश में भी अच्छा मुनाफा मिल रहा हो और विदेश में भी अच्छा offer हो। वो naturally उस तरफ झुकेगा जहाँ risk कम और return ज़्यादा हो। Foreign investors के साथ भी यही होता है।
Sensex और Nifty आगे कहाँ जाएंगे?
सोमवार को Sensex 77,095 और Nifty 24,103 पर बंद हुए थे लेकिन आज फिर दबाव दिख रहा है। Monsoon की स्थिति और आने वाली तिमाही के corporate results दो बड़े factors हैं जो बाज़ार की दिशा तय करेंगे। अगर results उम्मीद से बेहतर रहे तो FPIs की वापसी की उम्मीद बनेगी।
Nifty 50 आज के स्तर पर एक नाज़ुक जगह पर है। 24,000 का support बना रहा तो recovery जारी रह सकती है लेकिन इससे नीचे जाने पर 23,800 तक का सफर तेज़ी से हो सकता है।
आज का Nifty today analysis यही कहता है कि जल्दबाज़ी से बचो। जो Investors लंबे समय का नज़रिया रखते हैं उनके लिए हर बड़ी गिरावट में अच्छी companies को धीरे धीरे जोड़ने का मौका बनता है।
तुम्हें क्या लगता है Iran deal होने के बाद crude और सस्ता होगा और इससे Nifty को कितना फायदा मिलेगा?





