मई 2026 में देश के 8 बड़े उद्योगों में से 5 सिकुड़ गए, कोयला 10 महीने के सबसे बुरे हाल में, फिर भी बिजली और सीमेंट ने थामी नाव

On: June 25, 2026 5:12 PM

अगर तुम किसी factory में काम करते हो, या तुम्हारे घर में कोई ट्रक चलाता है, या तुम कहीं निर्माण का काम देखते हो तो यह खबर तुम्हारे लिए है। क्योंकि जो numbers आए हैं वो सिर्फ कागज़ पर नहीं हैं, इनका असर रोज़गार पर, कमाई पर और आम ज़िंदगी पर पड़ता है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 22 जून को जो आँकड़े जारी किए उन्होंने सबको चौंका दिया। मई 2026 में देश के आठ बड़े उद्योगों की सामूहिक रफ्तार घटकर सिर्फ 0.5 प्रतिशत रह गई। यह पिछले 21 महीनों में दूसरी सबसे धीमी growth है।


पहले समझो कि यह आठ उद्योग होते क्या हैं

बहुत लोग “core sector” सुनते हैं और आगे बढ़ जाते हैं क्योंकि लगता है यह कोई बहुत technical बात है। पर है नहीं।

ये आठ उद्योग हैं कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, तेल शोधन, खाद, बिजली, इस्पात और सीमेंट। इन्हें “मुख्य उद्योग” इसलिए कहते हैं क्योंकि बाकी सब उद्योग इन्हीं पर टिके होते हैं। इस्पात नहीं तो पुल नहीं। सीमेंट नहीं तो मकान नहीं। बिजली नहीं तो कुछ नहीं।

जब इन उद्योगों की रफ्तार धीमी होती है तो पूरी economy पर असर पड़ता है।


0.5 प्रतिशत, यह कितना बुरा है असल में?

तुलना करने से बात साफ होती है।

जब किसी महीने यह growth 6 या 7 प्रतिशत हो तो मतलब है कि उद्योग तेज़ी से दौड़ रहे हैं। जब 2 या 3 प्रतिशत हो तो धीमे हैं। और जब 0.5 प्रतिशत हो तो मतलब है कि गाड़ी बमुश्किल रेंग रही है।

पिछले 21 महीनों में सिर्फ एक बार इससे बुरा हाल हुआ था। यानी करीब पौने दो साल में यह दूसरा सबसे बुरा महीना रहा है। यह आँकड़ा अपने आप में बहुत कुछ कह देता है।


कोयला 10 महीने के सबसे बुरे हाल में, तेल की भी बुरी दशा

पाँच उद्योगों में गिरावट आई है और इनकी हालत देखकर तसल्ली नहीं होती।

कोयला उद्योग 9.3 प्रतिशत सिकुड़ गया। यह पिछले 10 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है। कोयला हमारे देश में बिजली बनाने का सबसे बड़ा ज़रिया है। जब कोयले का उत्पादन घटता है तो आगे चलकर बिजली की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

तेल शोधन यानी refinery sector में 8.7 प्रतिशत की गिरावट आई जो पिछले साढ़े तीन साल का सबसे बुरा प्रदर्शन है। पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस, यह सब refinery से आते हैं। जब refinery कम चलती है तो इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है।

प्राकृतिक गैस का उत्पादन 4.9 प्रतिशत घटा और कच्चे तेल में 4.6 प्रतिशत की कमी रही। यह दोनों मिलकर बताते हैं कि हमारे देश का ऊर्जा उत्पादन मई महीने में काफी दबाव में रहा।


इन गिरावटों की वजह क्या रही होगी?

मेरे हिसाब से कुछ बातें हैं जो इस slowdown की वजह हो सकती हैं।

मई में गर्मी अपने चरम पर होती है। कुछ खनन और उत्पादन गतिविधियाँ गर्मियों में धीमी पड़ जाती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की माँग और कीमतों में उतार चढ़ाव भी हमारे production को affect करता है।

कोयले की बात करें तो मानसून से पहले खदानों में पानी भरने की समस्या कई बार उत्पादन घटा देती है। और refinery sector की गिरावट के पीछे maintenance shutdowns भी हो सकते हैं जो साल में एक बार होते ही हैं।

पर यह सब अनुमान है। सरकार की तरफ से अभी तक detailed explanation नहीं आई है।


अच्छी खबर भी है, पूरी तरह निराश मत होओ

तीन उद्योग ऐसे हैं जिन्होंने इस मुश्किल महीने में भी अच्छा प्रदर्शन किया।

बिजली उत्पादन में 8.7 प्रतिशत की बढ़त आई। गर्मियों में AC और पंखों की वजह से बिजली की माँग बढ़ती है इसलिए यह growth naturally समझ में आती है। लेकिन यह ध्यान देने वाली बात है कि जब कोयला उत्पादन घट रहा है तो बिजली बढ़ रही है। इसका मतलब है कि शायद हम coal के अलावा दूसरे स्रोतों से ज़्यादा बिजली बना रहे हैं, जैसे सौर ऊर्जा।

सीमेंट में 8.4 प्रतिशत की बढ़त आई। यह खबर infrastructure और निर्माण क्षेत्र के लिए अच्छी है। देश में सड़कें, पुल और मकान बनने का काम जारी है।

इस्पात में 5 प्रतिशत की growth रही हालाँकि पिछले महीनों के मुकाबले यह थोड़ा कम है। लेकिन growth है, गिरावट नहीं।


शेयर बाज़ार पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर तुम shares में पैसा लगाते हो तो यह data तुम्हारे लिए एक signal है।

तेल और गैस कंपनियों पर नज़र रखो। जब production numbers इतने कमज़ोर हों तो इन कंपनियों की अगली तिमाही के नतीजे दबाव में हो सकते हैं। ONGC, Oil India जैसी कंपनियाँ directly इस data से जुड़ी हैं।

दूसरी तरफ सीमेंट कंपनियाँ इस बार अच्छी दिखती हैं। UltraTech, Shree Cement जैसी बड़ी companies को इस growth से फायदा हो सकता है।

बिजली sector की companies के लिए भी outlook positive दिखता है। Renewable energy companies खासकर तब जब coal production घट रहा हो और electricity demand बढ़ रही हो।

हालाँकि एक महीने के data पर बड़ा investment decision नहीं लेना चाहिए। यह एक संकेत है, पूरी कहानी नहीं।


एक बात जो आँकड़ों से परे है

मुझे एक ऐसे इंसान की याद आ गई जो राजस्थान की एक कोयला खदान के पास रहता है। उसने एक बार बताया था कि जब खदान का काम कम होता है तो पूरे इलाके की रौनक चली जाती है। दुकानें सुनसान, चाय की थड़ियाँ खाली और लोग घरों में बैठे।

यह 9.3 प्रतिशत की गिरावट सिर्फ एक number नहीं है। यह उन लोगों की रोज़ी रोटी से जुड़ा हुआ है जो इन उद्योगों पर निर्भर हैं।


आगे क्या देखना चाहिए?

जून और जुलाई के आँकड़े बताएँगे कि यह slowdown अस्थायी था या किसी बड़ी समस्या का संकेत। मानसून आने के बाद खनन गतिविधियाँ आमतौर पर प्रभावित होती हैं इसलिए अगले कुछ महीने भी उतार चढ़ाव भरे हो सकते हैं।

सरकार की नीतियाँ और international oil prices दोनों पर नज़र रखना ज़रूरी है। अगर crude oil की कीमतें ऊपर गईं तो refinery sector पर दबाव और बढ़ेगा।

और अगर बिजली और सीमेंट की growth इसी रफ्तार से जारी रही तो overall picture उतनी बुरी नहीं होगी जितनी headline numbers से लग रही है।

तुम्हारे हिसाब से इन आठ उद्योगों में से किसका हाल सबसे ज़्यादा चिंताजनक है और क्यों?

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