PM-KISAN की 23वीं किस्त जारी: एक दिन में 9 करोड़ किसानों के खाते में पहुँचे ₹18,880 करोड़

On: June 25, 2026 5:27 PM

20 जून 2026 की सुबह देश के किसी न किसी कोने में करोड़ों फोन एक साथ बजे होंगे। बैंक का मैसेज आया होगा, “आपके खाते में 2,000 रुपये जमा हुए।”यह छोटा सा मैसेज किसी के लिए बीज खरीदने की उम्मीद था, किसी के लिए बच्चे की फीस, और किसी के लिए घर का राशन।


एक दिन में इतना बड़ा पैसों का हस्तांतरण

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी PM-KISAN की 23वीं किस्त 20 जून को जारी हुई। इस बार 18,880 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम सीधे 9.44 करोड़ किसानों के बैंक खातों में भेजी गई।दुनिया में बहुत कम देश हैं जो एक दिन में इतने बड़े पैमाने पर सीधे पैसा आम लोगों तक पहुँचा पाते हैं। यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, यह एक बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक उपलब्धि भी है।

पैसा Direct Benefit Transfer यानी सीधे खाते में भेजने की व्यवस्था से गया। इसका मतलब बीच में कोई नहीं, न दलाल, न बिचौलिया, न कोई और। पैसा सरकार से सीधे किसान तक।


2.18 करोड़ महिला किसान, यह आँकड़ा अलग से ध्यान देने वाला है

इस बार की किस्त में एक बात और खास रही। लाभ पाने वालों में 2.18 करोड़ महिलाएँ थीं।

खेती को हमेशा मर्दों का काम माना जाता रहा है लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि देश के खेतों में महिलाएँ उतनी ही मेहनत करती हैं, कहीं कहीं तो ज़्यादा। उन्हें इस योजना में शामिल करना और सीधे उनके खाते में पैसा भेजना एक ज़रूरी कदम है।जब महिला के हाथ में पैसा आता है तो वो उसे घर पर खर्च करती है, बच्चों पर लगाती है। यह पैसा बर्बाद नहीं होता।


योजना की बुनियाद क्या है, जो नहीं जानते उनके लिए

PM-KISAN केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत जिन किसान परिवारों के पास ज़मीन है उन्हें हर साल 6,000 रुपये मिलते हैं। यह रकम एक साथ नहीं आती बल्कि तीन बार में आती है, हर बार 2,000 रुपये।साल में तीन बार 2,000 रुपये। यह कोई बहुत बड़ी रकम नहीं है, यह सच है। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक भरोसेमंद आमदनी है जो हर चार महीने में आती रहती है।


18,880 करोड़ का गाँव की अर्थव्यवस्था पर असर

जब इतनी बड़ी रकम एक साथ किसानों के हाथ में आती है तो उसका असर सिर्फ उन किसानों तक नहीं रहता।

वो किसान जो 2,000 रुपये पाता है वो उसे अपने गाँव की दुकान पर खर्च करता है। दुकानदार को कमाई होती है, वो आगे किसी को कुछ खरीदता है। यह पैसा घूमता रहता है और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को थोड़ी ऑक्सीजन मिलती है।

अर्थशास्त्र की भाषा में इसे multiplier effect कहते हैं। यानी एक रुपये का असर एक रुपये से ज़्यादा होता है।


शेयर बाज़ार से जोड़कर देखें तो

जो लोग shares में पैसा लगाते हैं उनके लिए यह खबर भी कुछ संकेत देती है।

जब किसानों के हाथ में पैसा आता है तो वो सबसे पहले रोज़मर्रा की ज़रूरत का सामान खरीदते हैं। खाद, बीज, कीटनाशक और घर का सामान। इससे FMCG कंपनियों को फायदा होता है जो ग्रामीण बाज़ार में काम करती हैं।

इसके अलावा खाद कंपनियाँ, बीज बनाने वाली कंपनियाँ और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले छोटे बैंक भी इस तरह की किस्तों से अप्रत्यक्ष रूप से फायदा उठाते हैं।

Hindustan Unilever, Dabur, Marico जैसी कंपनियाँ अपनी तिमाही रिपोर्ट में rural demand का ज़िक्र करती हैं। PM-KISAN जैसी किस्तें उस demand को थोड़ा और मज़बूत करती हैं।


एक सवाल जो मन में आता है

2,000 रुपये हर चार महीने में। क्या यह सच में काफी है?

आज के दौर में जब खाद महँगी है, डीज़ल महँगा है और मज़दूरी बढ़ गई है, तो एक छोटे किसान के लिए 2,000 रुपये बहुत कम लग सकते हैं। यह रकम शायद एक एकड़ खेत की जुताई का खर्च भी पूरा न करे।लेकिन यह भी सच है कि पहले यह भी नहीं मिलता था। योजना शुरू होने से पहले छोटे किसानों के पास कोई guaranteed आमदनी नहीं थी।

तो यह एक शुरुआत है, मंज़िल नहीं।


ज़मीन पर असल तस्वीर

मध्यप्रदेश के एक गाँव के किसान से बात हुई थी कुछ समय पहले। उन्होंने कहा था कि PM-KISAN का पैसा आता है तो एक राहत मिलती है। “बड़ा काम नहीं होता इससे, लेकिन घर में कुछ न कुछ ज़रूरत तो पूरी हो जाती है।”

यही इस योजना की असली पहचान है। यह किसान को अमीर नहीं बनाती, लेकिन थोड़ी साँस लेने की जगह ज़रूर देती है।9.44 करोड़ परिवार। 2.18 करोड़ महिलाएँ। और 18,880 करोड़ रुपये जो सीधे खाते में गए।यह संख्याएँ सिर्फ आँकड़े नहीं हैं।

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