
“Swiss bank में पैसा है” यह जुमला भारत में दशकों से काले धन का पर्याय बन गया है। हर चुनाव में नेता इसका ज़िक्र करते हैं, social media पर debates चलती हैं और आम आदमी के मन में एक तस्वीर बनी रहती है कि कोई न कोई वहाँ अपना पैसा छुपाए बैठा है।
लेकिन 18 जून 2026 को Swiss National Bank यानी SNB ने जो data जारी किया उसने इस पूरी तस्वीर को थोड़ा पेचीदा बना दिया।
आंकड़े क्या कहते हैं?
2025 में Swiss banks में भारतीय clients से जुड़े कुल funds 8% से ज़्यादा गिरकर CHF 3.25 billion यानी करीब ₹36,793 करोड़ रह गए। यह 2024 में CHF 3.5 billion थे जो उस साल तीन गुना बढ़कर 2021 के बाद सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचे थे।
लेकिन इसी data में एक उलटी बात भी है। Individual और institutional clients के customer accounts में जमा पैसा 50% से ज़्यादा बढ़कर CHF 524 million यानी करीब ₹6,000 करोड़ हो गया।
तो कुल पैसा घटा लेकिन direct customer deposits बढ़े। यह विरोधाभास समझने के लिए थोड़ा गहरे जाना होगा।
असली गिरावट कहाँ आई?
कुल funds का सबसे बड़ा हिस्सा “amounts due to banks” category में है यानी वो पैसा जो दूसरे banking और financial institutions के ज़रिए रखा जाता है। यह CHF 2.6 billion है लेकिन एक साल में करीब 15% घटा।
Fiduciaries और trusts के ज़रिए रखा गया पैसा तो और भी तेज़ी से घटा CHF 41 million से सीधे CHF 18.6 million पर आ गया यानी 55% की गिरावट। “Other amounts” भी CHF 135 million से घटकर CHF 105.7 million रह गए।
सरल भाषा में , जो पैसा financial institutions, trusts और intermediaries के ज़रिए रखा जाता था वो तेज़ी से कम हुआ। लेकिन जो पैसा directly individual या company के नाम पर account में था वो बढ़ा।
क्या यह Black Money है?
यह सवाल हर बार उठता है।
Swiss National Bank ने साफ कहा है कि यह data alleged black money का आंकड़ा नहीं है। इसमें individuals, companies, banks और financial institutions सभी के funds शामिल हैं। यानी अगर किसी Indian company ने Switzerland की किसी firm के साथ legitimate business transaction किया और उसका पैसा Swiss bank में है तो वो भी इस data में आएगा।
Switzerland और India के बीच 2018 से automatic information exchange चल रहा है। September 2019 से Indian tax authorities को Swiss accounts की detailed financial information मिलनी शुरू हुई और यह process तब से हर साल जारी है। इसके अलावा जहाँ financial wrongdoing का prima facie evidence मिला है वहाँ hundreds of cases में specific account information भी share की गई है।
BIS का अलग data क्या कहता है?
Bank for International Settlements यानी BIS का data, जिसे Indian और Swiss authorities ने individual Indian deposits का ज़्यादा reliable measure माना है, एक अलग तस्वीर दिखाता है। इसके मुताबिक 2025 में individual deposits 20% बढ़कर USD 89.73 million यानी करीब ₹780 करोड़ हो गए।
यह आंकड़ा 2007 के peak USD 2.3 billion से अभी भी बहुत कम है लेकिन trend upward है।
दुनिया में भारत कहाँ खड़ा है?
UK सबसे आगे है CHF 192 billion के साथ। उसके बाद US CHF 75 billion और France CHF 63 billion पर हैं। India 46वें स्थान पर है जो 2024 के 48वें स्थान से बेहतर है।
| देश | Swiss Bank में funds |
|---|---|
| UK | CHF 192 billion |
| US | CHF 75 billion |
| France | CHF 63 billion |
| Bangladesh | CHF 842 million |
| India | CHF 3.25 billion (46वाँ स्थान) |
| Pakistan | CHF 257 million |
पड़ोसी देशों की बात करें तो Pakistan का पैसा CHF 272 million से घटकर CHF 257 million रहा जबकि Bangladesh ने 43% की ज़बरदस्त बढ़त दर्ज की और CHF 842 million पर पहुँच गया।
Bangladesh का यह उछाल दिलचस्प है और थोड़ा चौंकाने वाला भी।
2006 से अब तक का सफर
2006 में Indian funds Swiss banks में अपने record high CHF 6.5 billion पर थे। उसके बाद से mostly गिरावट ही रही है हालाँकि 2011, 2013, 2017, 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 में कुछ बढ़त देखी गई।
यानी पिछले करीब 20 सालों में असली trend downward ही रहा है। automatic information exchange और tax transparency बढ़ने का असर साफ दिखता है।
मेरे हिसाब से यही सबसे बड़ा signal है। जब चोरी पकड़े जाने का डर बढ़े तो छुपाने की जगह बदल जाती है।
तो असल में हो क्या रहा है?
जो बड़ी तस्वीर बनती है वो यह है कि banking intermediaries और trusts के ज़रिए जो structured flows थे वो information sharing के डर से कम हो रहे हैं। लेकिन transparent और legitimate customer deposits बढ़ रहे हैं।
यह एक healthy shift का संकेत भी हो सकता है। जो openly पैसा रखना है वो बढ़ रहा है और जो छुपाकर रखना था वो घट रहा है।लेकिन एक सवाल जो मन में आता है अगर BIS data के मुताबिक individual deposits बढ़ रहे हैं तो क्या सब कुछ legitimate है? इसका जवाब सिर्फ tax authorities दे सकते हैं और वो काम चल रहा है।
क्या तुम्हें लगता है कि India-Switzerland के बीच automatic information exchange से genuinely black money पर लगाम लगी है या लोगों ने बस अपने पैसे छुपाने की जगह बदल ली है?





