90,000 करोड़ की ज़मीन, अब बारी है कमाई की

On: July 16, 2026 4:08 PM

Real estate सेक्टर में एक बात हमेशा सुनने को मिलती है कि जमीन जितनी ज़्यादा उतनी ताकत ज़्यादा। पर सच यह भी है कि बहुत सारी कंपनियां जमीन खरीदकर सालों तक बैठी रहती हैं और वो पैसा वहीं फंसा रह जाता है। Prestige Estates की कहानी इस मामले में थोड़ी अलग दिखती है, और यही वजह है कि इस स्टॉक पर चर्चा बढ़ गई है।

Bangalore की इस कंपनी के पास अभी करीब 80 से 90 हज़ार करोड़ रुपये की land pipeline बताई जा रही है। Chairman Irfan Razack ने हाल ही में इस पर खुलकर बात की और साथ में यह भी साफ किया कि यह सिर्फ कागज़ी आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसे actual प्रोजेक्ट्स में बदलने की तैयारी चल रही है। कंपनी इसी फाइनेंशियल ईयर में करीब 58 से 60 हज़ार करोड़ रुपये के नए launches की योजना बना रही है, जो Bengaluru, Mumbai Metropolitan Region और Delhi NCR जैसे बड़े मार्केट में फैले होंगे।

जमीन बैंक करना अलग बात है, जमीन दबाकर बैठना अलग

मैंने notice किया है कि real estate कंपनियों को अक्सर एक ही तरह से जज किया जाता है, बड़ी land bank है तो अच्छा या बुरा, यह डिबेट हमेशा चलती रहती है। Razack ने इसी पर सफाई दी कि Prestige का मॉडल जमीन को जल्दी monetize करने का है, ना कि पड़े रहने देने का।

उनके मुताबिक सबसे तेज़ case में जमीन खरीदने से लेकर प्रोजेक्ट market में लॉन्च होने तक सिर्फ 9 महीने लगते हैं। normal case में यह टाइम बढ़कर 15 से 18 महीने तक चला जाता है। इंडस्ट्री के हिसाब से देखा जाए तो यह स्पीड काफी तेज़ मानी जाती है क्योंकि approvals में ही ज़्यादातर डेवलपर्स को एक से दो साल लग जाते है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या इतनी तेज़ी हमेशा मुमकिन रहेगी, खासकर जब कंपनी नए शहरों में विस्तार कर रही है जहां लोकल नियम और approval process अलग तरह की होती है।

नए शहरों में एंट्री, पर सोच समझकर

Prestige अब सिर्फ Bangalore तक सीमित नहीं रह गई है। कंपनी ने Chennai, Hyderabad, Goa, Mumbai और अब Delhi NCR तक अपना दायरा बढ़ाया है। यह वही कंपनी है जिसने पांच साल पहले Mumbai में कदम रखा था, जहां पहले से Lodha और Godrej Properties जैसे बड़े नाम मौजूद थे, और आज उसी मार्केट में Prestige अच्छी पकड़ बना चुकी है।

Razack ने कहा कि हर डील खरीदने से पहले पूरी तरह जांची जाती है। कंपनी का फोकस सिर्फ ग्रोथ नंबर पर नहीं, बल्कि valuation सही होने पर भी रहता है। यह strategy investors के लिए एक भरोसे की बात हो सकती है, क्योंकि aggressive expansion के दौरान गलत डील में पैसा फंस जाना एक आम रिस्क है।

मान लो कोई Ahmedabad का निवेशक realty स्टॉक्स में पैसा लगाने की सोच रहा है। उसके लिए सिर्फ launch pipeline का आंकड़ा देखना काफी नहीं है, यह भी देखना ज़रूरी है की कंपनी नए शहरों में execution कैसे कर रही है, क्योंकि हर शहर की approval timeline अलग होती है।

अटका हुआ पैसा, जो बैलेंस शीट में दिखता ही नहीं

अब बात करते हैं उस आंकड़े की जो शायद सबसे दिलचस्प है। Prestige के पास करीब 65 हज़ार करोड़ रुपये का unrecognised revenue है। सीधी भाषा में समझें तो यह वो sales हैं जो ग्राहकों के साथ पहले ही फाइनल हो चुकी हैं, पैसा भी committed है, लेकिन accounting नियमों के तहत यह अभी कंपनी की किताबों में revenue के तौर पर नहीं गिना जाता।

Razack ने इसे “पॉट ऑफ गोल्ड” कहा। असल में इसकी वजह यह है कि Prestige अभी completion method अपनाती है, यानी revenue तभी count होता है जब प्रोजेक्ट पूरा हो जाए। कंपनी अब auditors से percentage of completion method पर शिफ्ट होने की बात भी कर रही है, जिससे भविष्य में revenue रिकग्निशन का तरीका बदल सकता है।

यह 65 हज़ार करोड़ मुख्य रूप से तीन शहरों में बंटा है:

  • Bangalore में 30,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा
  • Mumbai में करीब 15,000 करोड़ रुपये
  • Hyderabad में 11,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा

टारगेट क्या है इस साल

पिछले फाइनेंशियल ईयर में Prestige ने रिकॉर्ड करीब 30 हज़ार करोड़ रुपये की pre-sales दर्ज की थी। इस साल यानी FY27 के लिए कंपनी 35 से 37 हज़ार करोड़ रुपये तक का टारगेट रख रही है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 15 से 20% ज़्यादा है। Global uncertainty और West Asia में तनाव के बावजूद Razack का कहना था कि housing demand मजबूत बनी हुई है।

सच कहूं तो जब कोई management इतने confident tone में टारगेट देता है, तो investors को यह भी देखना चाहिए कि पिछले साल का targets कितना पूरा हुआ था। सिर्फ आगे की बातें सुनकर फैसला लेना सही तरीका नहीं है।

रिस्क को नज़रअंदाज़ मत करो

अब यहां थोड़ी balanced बात भी ज़रूरी है। पहले भी Prestige को approval delays का सामना करना पड़ा है, चाहे वो elections की वजह से हो या local नियमों की वजह से। Construction cost भी लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर margins पर पड़ता है। कंपनी पर debt भी है, और अगर launches में देरी होती रहे तो cash flow पर दबाव बन सकता है।

दूसरी तरफ अगर कंपनी अपनी land pipeline को समय पर execute कर पाती है, तो आने वाले सालों में revenue visibility काफी strong रहने वाली है, खासकर वो unrecognised revenue जो अभी books में छुपा हुआ है।

इस स्टॉक को देखते वक्त सिर्फ launch pipeline के बड़े नंबर पर मत जाओ, यह भी ट्रैक करते रहो कि हर तिमाही में actual launches टारगेट के हिसाब से हो रहे हैं या नहीं।

Vivek

Experience:
Covers the Indian Stock Market, IPOs, Mutual Funds, Corporate Announcements, and Business News.
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