
बैंक की सहायक कंपनियां अक्सर parent के साये में ही रह जाती हैं, न ज़्यादा चर्चा में आती हैं न कोई खास ध्यान खींचती हैं। पर HDB Financial Services के June quarter के नतीजों ने इस धारणा को थोड़ा हिला दिया है। HDFC Bank की इस NBFC सहायक कंपनी ने अपने पूरे इतिहास की सबसे अच्छी तिमाही दर्ज की है, और आंकड़े देखकर लगता है कि यह सिर्फ एक अच्छी तिमाही नहीं बल्कि एक ठोस turnaround स्टोरी है।
मुनाफे का आंकड़ा जो चौंका गया
net profit की बात करें तो यह 568 करोड़ रुपये से बढ़कर सीधा 785 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, यानी 38.3% का उछाल। यह कोई मामूली ग्रोथ नहीं है, खासकर तब जब कंपनी पहले से ही एक बड़े base पर काम कर रही हो। टैक्स से पहले का मुनाफा तो और भी तेज़ी से बढ़ा, 733 करोड़ रुपये से 1,055 करोड़ रुपये तक, यानी करीब 44%।
मेरे हिसाब से इस ग्रोथ की असली कहानी सिर्फ बड़े मुनाफे में नहीं है, बल्कि उसके पीछे के कारणों में है। Net Interest Income यानी NII 2,092 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,509 करोड़ रुपये हो गया, करीब 20% की छलांग। और Pre-Provisioning Operating Profit भी 1,402 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,752 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि कंपनी की core lending business वाकई मजबूत हुई है, यह सिर्फ accounting का खेल नहीं है।
लोन बांटने की स्पीड और AUM की तस्वीर
लोन बांटने की रफ्तार भी कम नहीं रही। इस तिमाही में कंपनी ने कुल 17,629 करोड़ रुपये के लोन डिस्बर्स किए, पिछले साल के मुकाबले 16.2% ज़्यादा। और सबसे दिलचस्प बात, AUM यानी assets under management एक साल में 1.09 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.22 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
क्या इतनी तेज़ ग्रोथ के साथ risk भी बढ़ा है? सवाल जायज़ है, क्योंकि NBFC सेक्टर में अक्सर तेज़ी से बांटे गए लोन बाद में NPA का सिरदर्द बन जाते हैं। पर इस मामले में तस्वीर उलटी दिख रही है।
NPA घटा, capital मजबूत बना रहा
Gross NPA पिछले साल के 2.56% से घटकर अब 2.34% पर आ गया है। Net NPA भी करीब 1.04% पर स्थिर बना हुआ है। सच कहूं तो जब कोई कंपनी loan book बढ़ाते हुए भी bad loans कम कर पाती है, तो इसका मतलब management का underwriting काफी disciplined है। यह हर NBFC के लिए इतना आसान नहीं होता।
capital की मजबूती भी कम नहीं आंकी जा सकती। कंपनी का capital adequacy ratio 21.29% पर है, जो regulatory ज़रूरत से कहीं ज़्यादा है। इसका सीधा मतलब यह है कि आगे भी growth के लिए पूंजी की कोई कमी नहीं दिखती।
कहां से आई इतनी ग्रोथ
अब बात करते हैं इस ग्रोथ के पीछे किन बिज़नेस लाइन का हाथ रहा। कंपनी तीन मुख्य वर्टिकल में काम करती है, Enterprise Lending, Asset Finance और Consumer Finance। इस तिमाही में gold loan और consumer finance सेगमेंट ने खासा जोर पकड़ा। loan book का करीब 74% हिस्सा अभी secured लोन का है, बाकी 26% unsecured, यानी कंपनी का risk mix भी काफी संतुलित नज़र आता है।
मान लो कोई Vadodara का छोटा manufacturing यूनिट चलाने वाला बिज़नेसमैन है जिसे working capital के लिए तुरंत पैसा चाहिए। बड़े बैंक अक्सर ऐसे मामलों में देर लगा देते हैं, पर HDB जैसी NBFC यहीं फायदा उठाती है। इनकी असली ताकत ही यही है कि यह छोटे शहरों और छोटे बिज़नेस तक तेज़ी से पहुंच पाती हैं।
कंपनी की पहुंच भी काफी बड़ी हो चुकी है। अभी इसके 1,710 branches देश के 1,165 शहरों और कस्बों में फैले हैं, और ग्राहकों की संख्या एक साल में 18.6% बढ़कर करीब 2.39 करोड़ हो गई है। इतनी तेज़ रफ्तार से customer base बढ़ना दिखाता है कि कंपनी सिर्फ पुराने ग्राहकों के भरोसे नहीं बैठी, नए मार्केट में भी लगातार पैर जमा रही है।
खर्च भी कम हुआ, efficiency भी बढ़ी
एक और छोटी पर काम की बात, कंपनी का cost to income ratio भी 42.7% से घटकर 39.9% पर आ गया है। सीधी भाषा में कहें तो अब कंपनी पहले से कम खर्च में ज़्यादा कमाई निकाल पा रही है। brokerage firm Nirmal Bang ने भी इन नतीजों को estimates से बेहतर बताया है, जो निवेशकों के लिए एक और भरोसे की बात हो सकती है।
management earnings call में यह भी बताते हुए दिखे कि कंपनी एक AI आधारित transformation program पर काम कर रही है, जिसका मकसद customer onboarding और collections को और स्मूथ बनाना है। ऐसी पहल अगर सही तरीके से लागू हो जाए तो आगे चलकर cost में और कमी आ सकती है।
पर यार, जैसा दिख रहा है वैसा है नहीं।
अब थोड़ी सावधानी वाली बात भी कर लेते हैं, क्योंकि सिर्फ अच्छी खबर दिखाना पूरी तस्वीर नहीं होती। RBI ने FY27 के लिए GDP growth का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया है, वहीं inflation का अनुमान बढ़कर 5.1% हो गया है। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में funding cost पर दबाव बन सकता है, और इसका सीधा असर margins पर पड़ सकता है।
West Asia में जारी तनाव और उससे जुड़े supply chain risk भी एक चिंता का विषय बने हुए हैं। हालांकि management ने साफ किया की अभी तक ग्राउंड लेवल पर इसका कोई बड़ा असर नहीं देखा गया है, पर आगे के लिए यह एक monitorable factor ज़रूर है।
अगर आप NBFC सेक्टर में निवेश की सोच रहे हो तो इस तिमाही के नतीजे देखकर सिर्फ headline growth पर मत जाओ। अगली दो तिमाहियों में NIM और credit cost पर नज़र बनाए रखना, क्योंकि यही तय करेगा कि यह मोमेंटम एक बार की चमक है या सच में टिकाऊ बदलाव।





