
मैंने सुबह सुबह जब न्यूज़ खोली तो पहली नज़र में लगा शायद कोई आम प्रोटेस्ट होगा। मगर थोड़ी देर स्क्रॉल करने के बाद समझ आया, ये मामला उतना छोटा नहीं है जितना लग रहा था।
बात है गुरुवार की। राहुल गांधी के दिल्ली वाले घर पर सुबह से ही नेताओं का तांता लगा हुआ था। मल्लिकार्जुन खरगे पहुंचे, फिर सुप्रिया सुले, अखिलेश यादव, जयराम रमेश। इसके बाद संजय यादव, परिणीति शिंदे, शफी परम्बिल, प्रमोद तिवारी, अखिलेश प्रसाद सिंह, इमरान प्रतापगढ़ी भी आ गए। घर के बाहर से देखने पर ही समझ आ जाता कि आज कुछ बड़ा होने वाला है।
मीटिंग का मकसद था NEET पेपर लीक पर आगे की रणनीति तय करना। मगर जो असली ड्रामा था वो मीटिंग खत्म होने के बाद शुरू हुआ।
पुलिस बैरिकेड और वो कुछ मिनटों की खींचतान
निकलते ही रुकावट आ गई। दिल्ली पुलिस ने आवास के बाहर बैरिकेडिंग कर रखी थी, बस को आगे बढ़ने ही नहीं दिया। कुछ मिनट तक बातचीत होती रही, आखिर में रास्ता खुला और काफिला निकल पड़ा गांधी स्मृति की ओर।
राहुल गांधी ने निकलने से ठीक पहले जो कहा वो इस पूरी यात्रा की जान थी। उनके शब्दों में, छात्र अपने भविष्य के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं तो विपक्ष कैसे चुप बैठ सकता है। उन्होंने बताया कि पहले इंडिया गेट का इरादा था पर मना कर दिया गया, गांधी स्मृति भी आसानी से नहीं मिली, फिर भी संदेश यही है कि छात्रों की आवाज़ हर जगह पहुंचाई जाएगी, संसद तक भी और सड़क तक भी।
गांधी स्मृति पहुंचने पर उनकी अगली लाइन ने पूरे दिन की सुर्खी बन गई। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं तो संसद नहीं चलेगी। साथ ही मांग रखी कि पीएम मोदी खुद पहल करें और शिक्षा मंत्री को पद से हटाएं।
एक्स पर लिखी गई भावुक पोस्ट
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी अपनी बात रखी। लिखा कि INDI गठबंधन के नेता शांतिपूर्वक तीस जनवरी मार्ग होते हुए गांधी स्मृति पहुंच रहे हैं। इसके आगे जो लिखा वो थोड़ा भारी था, उन बच्चों की याद जिन्होंने पेपर लीक के बाद जान गंवा दी। साथ ही उन छात्रों का ज़िक्र भी किया जो शांतिपूर्ण तरीके से न्याय मांगते हुए चोटिल हुए। आखिर में एक लाइन थी, भारत का छात्र अकेला नहीं, पूरा विपक्ष उसके साथ है।
बीजेपी को नहीं आई ये बात रास
उधर बीजेपी खेमे से तीखी प्रतिक्रिया आई। पार्टी महासचिव बीएल संतोष ने एक्स पर लिखा कि राहुल गांधी के घर फिर एक ड्रामा शुरू हो गया है, खाली बसें आ रही हैं, सांसद इकट्ठा हो रहे हैं। उनका आरोप था कि ये सब जंतर मंतर पर चल रहे असली प्रदर्शन से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है और इस नाटकबाजी में देश का ही घाटा हो रहा है।
आंकड़ों के साथ विपक्ष का हमला
सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, विपक्ष ने आंकड़े भी सामने रखे। आरजेडी सांसद संजय यादव ने बताया कि पिछले दस साल में देशभर में 152 पेपर लीक हो चुके हैं, इसके बावजूद किसी बड़े दोषी को सज़ा नहीं मिली। उनका कहना था कि शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता जैसी चीज़ अब बची ही नहीं। सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने भी अपनी बात रखी, कहा कि सरकार छात्रों की आवाज़ को दबाने पर तुली है इसलिए विपक्ष का गांधी स्मृति जाना ज़रूरी हो गया था, ये लोकतांत्रिक विरोध का तरीका है, कुछ और नहीं।
विपक्ष की डिमांड लिस्ट
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें
- पेपर लीक की जांच निष्पक्ष और समय पर हो
- NTA की जवाबदेही तय हो
- दोषियों पर सख्त एक्शन ताकि परीक्षा तंत्र पर भरोसा बहाल हो
- सरकार संसद के अंदर बाहर दोनों जगह जवाबदेह बने
सरकार भी पीछे नहीं, पर बातचीत की जगह पर फंसा पेच
सरकार की तरफ से भी लगातार जवाब आ रहे हैं। पीएम मोदी ने गुरुवार सुबह ऐलान किया कि पेपर लीक के मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाएंगे ताकि जल्द फैसला हो सके। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह चुके हैं कि सरकार जितनी देर चाहे उतनी देर बातचीत को तैयार है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी दोहराया कि बीते 24 घंटे में सरकार ने कई बार बातचीत का न्योता भेजा है, चाहे मुद्दा पेपर लीक हो या उससे जुड़े दूसरे मसले, सब पर खुले मन से बात होगी। जगह सुझाई गई जेपी नड्डा का आवास या दफ्तर।
मगर यहीं मामला अटक गया। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने साफ मना कर दिया कि किसी मंत्री के घर या ऑफिस में बात नहीं होगी। उनके प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि बातचीत से इनकार नहीं, पर जगह होनी चाहिए या तो जंतर मंतर या फिर कोई ऐसी न्यूट्रल जगह जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों।
पहले भी हो चुकी है हिरासत की घटना
ये टकराव नया नहीं है। इससे पहले मंगलवार को राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस सांसदों ने पीएम आवास के बाहर धरना दिया था, मांग वही, पीएम मोदी और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। उसी समय जंतर मंतर पर CJP का प्रदर्शन भी चल रहा था। हालात बिगड़ते देख दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया था। कुछ घंटों बाद सबको छत्रसाल स्टेडियम से रिहा किया गया।
अब देखना ये है कि गांधी स्मृति की ये यात्रा सिर्फ एक भावनात्मक और प्रतीकात्मक कदम बनकर रह जाती है या इसका असर संसद के अंदर भी दिखेगा। मानसून सत्र जिस तरह ठप पड़ा है, और दोनों पक्ष जिस तरह अपनी अपनी शर्तों पर अड़े हैं, फिलहाल तो हल निकलता नज़र नहीं आ रहा।





