अब पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं, 10 साल जेल और 10 करोड़ का जुर्माना, कैबिनेट ने दी मंजूरी

On: July 24, 2026 4:50 PM

रात के 12 बज रहे थे जब पीएम मोदी का वीडियो आया, और अगली सुबह तक पूरा माहौल बदल चुका था। कहानी शुरू होती है गुरुवार आधी रात से, जब देशभर में छात्र सड़कों पर उतरे हुए थे और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा था।

पीएम मोदी ने एक्स पर करीब तीन मिनट का वीडियो पोस्ट किया। बात सीधी और साफ थी, पेपर लीक कोई छोटा मुद्दा नहीं, ये लाखों बच्चों और उनके घरवालों की ज़िंदगी से जुड़ा मसला है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई महीने में सरकार ने कई कदम उठाए, दोषी पकड़े गए, जेल में हैं। और सबसे बड़ी बात, छात्रों का साल बर्बाद न हो इसलिए कम समय में ही 22 लाख छात्रों की परीक्षा करवाई गई, नतीजा भी 19 जुलाई को आ गया।

इसी वीडियो में एक और संकेत था, अगले दिन यानी शुक्रवार को कैबिनेट बैठक में पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने पर चर्चा होगी।

कैबिनेट ने दी मंजूरी, अब 10 साल जेल और 10 करोड़ जुर्माना

फिर वही हुआ जो कहा गया था। पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई और पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन को मंजूरी मिल गई। बैठक के बाद पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच भी बातचीत हुई।

नए प्रस्तावित बिल में जो सबसे बड़ी बात है वो ये कि ऑर्गनाइज़्ड क्राइम की तरह पेपर लीक करने वालों को अब 10 साल तक जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। सरकार अगले हफ्ते इस संशोधित बिल को संसद में पेश करने की तैयारी में है, माना जा रहा है सोमवार को लोकसभा में ये आ सकता है।

अभी कानून में क्या है, फर्क समझिए

देश में अभी जो कानून लागू है वो 12 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू हुआ था। इसमें अभी जो सज़ा का प्रावधान है वो कुछ यूं है

  • सिर्फ पेपर लीक करने पर, 3 से 5 साल जेल और 10 लाख तक जुर्माना
  • संगठित गिरोह शामिल होने पर, 5 से 10 साल जेल और कम से कम 1 करोड़ जुर्माना
  • सर्विस प्रोवाइडर या एजेंसी दोषी पाई जाए तो, 1 करोड़ जुर्माना, परीक्षा की पूरी लागत वसूली, और अगले चार साल तक कोई परीक्षा कराने पर रोक

अब नए संशोधन के बाद ये सज़ा और जुर्माना दोनों काफी बढ़ जाएंगे। साथ ही ये अपराध पहले भी गैर जमानती था और अब भी रहेगा, समझौता इसमें नहीं हो सकता। जांच का ज़िम्मा DSP रैंक या उससे सीनियर अफसर के पास रहेगा।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी होगा गठन

पीएम मोदी पहले ही ऐलान कर चुके थे कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। नए प्रावधान के तहत इन कोर्ट्स के लिए ये अनिवार्य होगा कि मामले का निपटारा और सज़ा तीन महीने के भीतर सुनाई जाए। गुरुवार सुबह ही उन्होंने इसका इशारा दिया था, रात के वीडियो में इसे और साफ कर दिया गया।

प्रदर्शन अभी भी जारी, मांगें कम नहीं हो रहीं

इस बीच जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का प्रदर्शन लगातार चल रहा है। पार्टी के अभिजीत दिपके की अगुवाई में देशभर में विरोध बुलाया गया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की जवाबदेही तय हो, पूरे सिस्टम में सुधार हो, और मई में पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया जाए।

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक इसी मुद्दे को लेकर 26 दिन का अनशन कर चुके हैं। संसद के अंदर भी हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को दावा किया था कि पिछले दस साल में देश में करीब 150 बार पेपर लीक हो चुका है, और इनमें से एक भी दोषी को अब तक सज़ा नहीं मिली।

CBI की जांच इस मामले में चल रही है, अलग अलग राज्यों से अब तक कुल 13 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

शिक्षा मंत्रालय में भी बड़ा फेरबदल

गुरुवार को ही केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी किया। 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव बनाया गया है। उन्होंने विनीत जोशी की जगह ली है। ये बदलाव ऐसे समय आया है जब मंत्रालय पहले से ही पेपर लीक विवाद को लेकर दबाव में है।

आगे क्या

अब सबकी नज़र अगले हफ्ते संसद पर है। सरकार का दावा है कि वो सख्ती से इस मुद्दे से निपटने को तैयार है, बिल जल्द से जल्द पास कराने की कोशिश होगी। पर दूसरी तरफ सड़क पर प्रदर्शन थमे नहीं हैं और विपक्ष भी अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। कानून सख्त होगा ये तो साफ है, मगर सवाल अब भी वही है, क्या इससे असली बदलाव आएगा या मामला फिर वहीं अटक जाएगा जहां पिछले सालों में अटकता रहा है।

Vivek

Experience:
Covers the Indian Stock Market, IPOs, Mutual Funds, Corporate Announcements, and Business News.
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