
गांव से निकलकर शहर में पढ़ाई करना कभी भी आसान नहीं होता। सबसे बड़ी टेंशन होती है,रहने और खाने की। कमरे का किराया, हर महीने का राशन और बिस्तर जैसी बुनियादी चीज़ें जुटाते-जुटाते ही परिवार का बजट बिगड़ जाता है। कई बार तो पैसों की कमी के चलते होनहार बच्चों को अपनी पढ़ाई तक बीच में छोड़नी पड़ती है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए बिहार सरकार का पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (BC & EBC) कल्याण विभाग एक शानदार योजना चलाता है,’अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण छात्रावास योजना’।
योजना क्या है, और क्यों शुरू हुई
BC (पिछड़ा वर्ग) और EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) के स्टूडेंट्स के लिए बिहार के सभी 38 जिलों में हॉस्टल की सुविधा दी जा रही है। इसका मकसद एकदम साफ है,आर्थिक तंगी या रहने की जगह न मिलने की वजह से किसी भी बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। अच्छी बात यह है कि यह योजना सिर्फ एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के हर जिले में इसके हॉस्टल मौजूद हैं।
छात्रावास में क्या-क्या मिलता है, पूरी लिस्ट
| सुविधा | विवरण |
| मासिक अनुदान | ₹1,000 प्रति छात्र हर महीने (सालाना ₹12,000) |
| मुफ्त राशन | 15 किलो हर महीने (इसमें 9 किलो चावल और 6 किलो गेहूं शामिल है) |
| रहने का सामान | खाट, गद्दा, चादर और खाना पकाने के बर्तन |
| डिजिटल सुविधाएं | CCTV, वाई-फाई, कंप्यूटर लैब, टीवी, वॉटर प्यूरीफायर (फंड के हिसाब से) |
| पढ़ाई में मदद | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और लाइब्रेरी की सुविधा |
हॉस्टल में खाना बनाने और परोसने का काम वॉर्डन (अधीक्षक) की देखरेख में होता है। यानी, आपको खुद खाना बनाने की टेंशन नहीं लेनी है। लेकिन यहां एक बात साफ कर दें कि सरकार की तरफ से राशन (चावल-गेहूं) मुफ्त मिलता है, लेकिन सब्जी, मसाले या खाना पकाने का बाकी खर्च छात्रों को ही मिल-बांटकर उठाना होता है। यह तरीका सही भी है, जिससे हॉस्टल के मेस का खर्च बजट में रहता है।
सुविधाओं की बात करें तो वाई-फाई, कंप्यूटर लैब, टीवी और वॉटर प्यूरीफायर जैसी चीज़ें भी लिस्ट में शामिल हैं। हालांकि, ये सब “फंड की उपलब्धता” पर निर्भर करती हैं। यानी ऐसा जरूरी नहीं कि हर हॉस्टल में ये सारी चीज़ें मौजूद ही हों।
इसके अलावा, जो स्टूडेंट्स सरकारी नौकरी या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए लाइब्रेरी और गाइडेंस की सुविधा भी हॉस्टल में ही मिल जाती है, जो कि पढ़ाई के माहौल के लिए बहुत जरूरी है।
कौन आवेदन कर सकता है
इस योजना का लाभ लेने के लिए ये तीन शर्तें पूरी करनी होंगी:
छात्र बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
उम्र 11 से 40 साल के बीच होनी चाहिए।
छात्र BC या EBC कैटेगरी में आता हो।
यहां उम्र की सीमा (11 से 40 साल) काफी अच्छी रखी गई है। इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ स्कूल जाने वाले बच्चे ही नहीं, बल्कि कॉलेज के स्टूडेंट्स या सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बड़े छात्र भी इसका फायदा ले सकते हैं।
किन दस्तावेज़ों की जरूरत होगी
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- पहचान पत्र (आधार कार्ड आदि)
- जाति प्रमाण पत्र
- बैंक पासबुक की कॉपी
- अन्य जरूरी कागज़ात (अगर मांगे जाएं)
डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट बहुत लंबी नहीं है, लेकिन जाति प्रमाण पत्र बनवाने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए इसे पहले से रेडी रखें। बैंक अकाउंट की डिटेल एकदम सही भरें ताकि ₹1000 महीने का अनुदान सीधे आपके खाते में बिना किसी रुकावट के आ सके।
आवेदन कैसे करें, पूरी ऑफलाइन प्रक्रिया
इस हॉस्टल के लिए कोई ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरा जाता है। आपको सारा काम ऑफलाइन (कागज़ी रूप से) करना होगा।
स्टेप 1 — सबसे पहले अपने स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल या रजिस्ट्रार ऑफिस जाएं और वहां से आवेदन फॉर्म मांगें।
स्टेप 2 — फॉर्म को ध्यान से भरें, अपनी पासपोर्ट साइज़ फोटो लगाएं, साइन करें और मांगे गए सभी डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी उसके साथ लगा दें।
स्टेप 3 — फॉर्म को पूरी तरह रेडी करने के बाद, लास्ट डेट से पहले संबंधित अधिकारी या ऑफिस में जाकर जमा कर दें।
स्टेप 4 — फॉर्म जमा करते वक्त रसीद (Receiving) लेना बिल्कुल न भूलें। चेक कर लें कि उस पर जमा करने की तारीख और मुहर/हस्ताक्षर सही से लगे हों।
ध्यान रखें, ऑनलाइन फॉर्म में तो आपको एप्लीकेशन नंबर या ट्रैकिंग आईडी मिल जाती है, लेकिन ऑफलाइन प्रक्रिया में आपकी वह रसीद ही इकलौता सबूत होती है कि आपने फॉर्म भरा है। इसलिए, उसे बहुत संभाल कर रखें।
संदर्भ (References)
- बी.सी. एवं ई.बी.सी. कल्याण विभाग, बिहार सरकार का आवेदन दिशानिर्देश | state.bihar.gov.in
- MyScheme website




