बिहार में आम की खेती करने वालों के लिए खुशखबरी: 18 हजार की सब्सिडी के साथ मुफ्त पौधे भी दे रही सरकार

On: August 7, 2026 5:58 PM

खेती-किसानी, खासकर बागवानी में सबसे बड़ी टेंशन शुरुआती लागत की होती है। आम का बगीचा लगाने के बाद फल आने में सालों लग जाते हैं, और तब तक किसान को अपनी जेब से ही खाद-पानी का खर्च उठाना पड़ता है। किसानों की इसी आर्थिक परेशानी को समझते हुए बिहार का कृषि विभाग एक बेहतरीन योजना लेकर आया है। ‘आम विकास योजना’ नाम की यह स्कीम असल में ‘मुख्यमंत्री बागवानी मिशन’ का ही हिस्सा है, जिससे आम की खेती करने वालों को सीधी राहत मिलेगी।

क्या है इस योजना की खासियत?

इस योजना का सीधा फोकस बिहार में आम की व्यावसायिक खेती (कमर्शियल फार्मिंग) को बढ़ावा देने पर है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसका दायरा पूरे बिहार में है। यानी आप राज्य के किसी भी जिले से हों, बेझिझक इसका फायदा ले सकते हैं।

अक्सर ऐसा होता है कि योजनाओं का लाभ छोटे किसानों या महिलाओं तक नहीं पहुंच पाता। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिला किसानों के लिए अलग से आरक्षण (कोटा) तय कर दिया है, ताकि हर तबके के किसान इस योजना का फायदा उठा सकें।

किसानों को कितनी मिलेगी आर्थिक मदद?

इस स्कीम के तहत सरकार सारा पैसा एक साथ न देकर तीन सालों में किस्तों के रूप में देती है, ताकि बगीचे की लगातार देखभाल हो सके:

सालप्रति हेक्टेयर मिलने वाली राशि
पहला साल₹18,000
दूसरा साल₹6,000
तीसरा साल₹6,000

शुरुआत में पौधे लगाने, खेत तैयार करने और खाद डालने में सबसे ज्यादा खर्च आता है, इसीलिए पहले साल की रकम सबसे बड़ी (18 हजार रुपये) रखी गई है। बाकी बचे दो सालों में भी पौधों की देखरेख के लिए सरकार छह-छह हजार रुपये देती है।

पैसों की इस मदद के साथ ही सरकार आम के अच्छी क्वालिटी वाले पौधे भी मुफ्त में उपलब्ध कराती है। आखिर पौधा बढ़िया होगा, तभी तो भविष्य में फसल अच्छी मिलेगी। और हां, सब्सिडी का यह सारा पैसा DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के ज़रिए सीधे आपके बैंक खाते में आता है, तो बीच में किसी बिचौलिये का झंझट भी नहीं है।

योजना का लाभ किन्हें मिलेगा?

सब्सिडी का फायदा लेने के लिए किसानों को कुछ बुनियादी शर्तें पूरी करनी होंगी:

-आवेदन करने वाला किसान बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।

-किसान के पास खेती के लिए अपनी (रैयती) जमीन होनी चाहिए।

-खेती का रकबा कम से कम 0.25 एकड़ और अधिकतम 10 एकड़ तक होना चाहिए।

-किसान का रजिस्ट्रेशन बिहार के DBT एग्रीकल्चर पोर्टल पर होना अनिवार्य है।

यहां जमीन की लिमिट (0.25 से 10 एकड़) इसलिए लगाई गई है ताकि योजना का फायदा बड़े जमींदारों के बजाय मुख्य रूप से छोटे और मझोले किसानों को मिल सके।

किस वर्ग के लिए कितना हिस्सा है तय?

योजना के तहत मिलने वाले लाभ में सामान्य वर्ग के किसानों के लिए 78.56%, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 20% और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 1.44% का हिस्सा तय किया गया है।

महिला किसानों को खेती में आगे लाने के लिए 30% का अलग से कोटा रखा गया है, जो ऊपर बताई गई सभी कैटेगरी की महिलाओं पर लागू होगा।

एक काम की बात और जान लीजिए,अगर जमीन आपके नाम पर है, तब तो आप अपनी लगान रसीद पर आवेदन कर ही सकते हैं। लेकिन अगर आप किराये या लीज पर जमीन लेकर खेती करते हैं (गैर-रैयत किसान), तो आप अपने एग्रीमेंट पेपर के आधार पर भी इस सब्सिडी का फायदा उठा सकते हैं।

फॉर्म भरने के लिए कौन-से कागजात चाहिए?

इस योजना में अप्लाई करने का प्रोसेस दो हिस्सों में है—पहला DBT रजिस्ट्रेशन और दूसरा मुख्य फॉर्म। दोनों के लिए अलग-अलग कागजातों की जरूरत पड़ेगी:

DBT रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी कागज़:

  1. आधार कार्ड (जो आपके चालू मोबाइल नंबर से लिंक हो)
  2. पासपोर्ट साइज फोटो
  3. किसान का पूरा विवरण (डिटेल्स)
  4. जमीन के कागजात
  5. बैंक पासबुक की डिटेल

आम विकास योजना के आवेदन के लिए:

  1. पासपोर्ट साइज फोटो
  2. जमीन का मालिकाना हक साबित करने वाले कागज या अद्यतन (करंट) लगान रसीद

ध्यान देने वाली बात: अगर जमीन की रसीद दादा-परदादा के नाम पर है और आपका नाम सीधे तौर पर कागज़ में नहीं है, तो आपको फॉर्म के साथ अपनी वंशावली (Family Tree) बनवाकर लगानी होगी।

आवेदन करने का सही तरीका क्या है?

यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और दो स्टेप्स में पूरी की जाती है। पहले आपको कृषि विभाग के पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा, उसके 48 घंटे बाद मुख्य फॉर्म भरा जाएगा।

स्टेप 1: DBT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन

सबसे पहले बिहार सरकार के कृषि विभाग के DBT (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) पोर्टल पर जाएं और रजिस्ट्रेशन पेज खोलें।

वहां अपना आधार वेरिफिकेशन पूरा करें। इसके लिए आधार नंबर डालें और मोबाइल पर आए OTP को भरकर सबमिट करें।

अगर आपके पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) है, तो उसकी डिटेल भरें।

अब अपनी जमीन और बैंक खाते की सही-सही जानकारी भरें। एक बार फिर OTP से कन्फर्मेशन दें। यह पूरा होते ही आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर मिल जाएगा।

स्टेप 2: योजना के लिए फाइनल आवेदन

DBT रजिस्ट्रेशन पूरा होने के तुरंत बाद आप योजना का फॉर्म नहीं भर सकते। आपको 48 घंटे रुकना होगा।

48 घंटे बीत जाने के बाद, फिर से ऑफिशियल वेबसाइट पर आएं और ‘आम विकास योजना’ वाले लिंक पर क्लिक करें।

अपना 13 अंकों का DBT रजिस्ट्रेशन नंबर डालें और ‘विवरण प्राप्त करें’ पर क्लिक करें। ऐसा करते ही आपकी ज्यादातर जानकारी स्क्रीन पर अपने आप आ जाएगी।

जो जानकारी (जैसे पता या जमीन की अतिरिक्त डिटेल) छूट गई है, उसे भरें और मांगे गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर दें।

फॉर्म सबमिट करते ही आपको एक ‘एप्लीकेशन नंबर’ (आवेदन संख्या) मिल जाएगा। इसे कहीं लिखकर रख लें और फाइनल फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर भविष्य के लिए सुरक्षित कर लें।

जानकारी के स्रोत:-

महत्वपूर्ण दिशा निर्देश

MyScheme

ऑनलाइन आवेदन पोर्टल

FAQs:-

आम विकास योजना क्या है?
यह बिहार सरकार के मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के अंतर्गत संचालित एक योजना है, जिसका उद्देश्य आम की खेती को बढ़ावा देना है। इसके तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे और आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
इस योजना के तहत कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?
योजना के अंतर्गत पहले वर्ष ₹18,000 प्रति हेक्टेयर तथा दूसरे और तीसरे वर्ष ₹6,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
क्या गैर-रैयत किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं?
हां, गैर-रैयत किसान निर्धारित अनुबंध प्रपत्र के आधार पर इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
योजना की सहायता राशि कैसे प्राप्त होती है?
सहायता राशि DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।
इस योजना के तहत किस प्रकार के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं?
योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले आम के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं।
आम विकास योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
सबसे पहले DBT पोर्टल पर आधार आधारित पंजीकरण करना होता है। पंजीकरण के लगभग 48 घंटे बाद प्राप्त रजिस्ट्रेशन संख्या के माध्यम से योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
इस योजना के लिए अधिकतम भूमि सीमा कितनी है?
योजना का लाभ लेने के लिए अधिकतम 10 एकड़ अर्थात 4 हेक्टेयर कृषि भूमि तक पात्रता निर्धारित की गई है।
क्या किसान समूह या सहकारी समितियां आवेदन कर सकती हैं?
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। योजना की पात्रता व्यक्तिगत रैयत और गैर-रैयत किसानों के आधार पर बताई गई है।
इस योजना के लिए न्यूनतम भूमि कितनी होनी चाहिए?
आवेदन के लिए न्यूनतम 0.25 एकड़ अर्थात 0.1 हेक्टेयर कृषि भूमि होना आवश्यक है।
क्या बिहार के सभी जिलों के किसान इस योजना का लाभ ले सकते हैं?
हां, यह योजना बिहार के सभी जिलों में लागू है और पात्र किसान इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
योजना में लाभार्थियों का आरक्षण कैसे तय किया गया है?
योजना में सामान्य वर्ग के लिए 78.56%, अनुसूचित जाति के लिए 20%, अनुसूचित जनजाति के लिए 1.44% तथा महिलाओं के लिए 30% भागीदारी का प्रावधान किया गया है।

Vivek

Experience:
Covers the Indian Stock Market, IPOs, Mutual Funds, Corporate Announcements, and Business News.
3+ Years covering Indian Financial Markets.

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