
आमतौर पर बिहार को नारियल की खेती के लिए नहीं जाना जाता। लेकिन, अब राज्य सरकार चाहती है कि यहां के किसान भी उन इलाकों में नारियल उगाएं, जहां पहले कभी इसकी खेती नहीं हुई। इसी पहल के तहत कृषि विभाग ने ‘नारियल पौधा वितरण योजना’ की शुरुआत की है। इस स्कीम के जरिए सरकार किसानों को भारी सब्सिडी पर नारियल के पौधे मुहैया करा रही है।
इस योजना का सीधा सा मकसद नारियल की खेती को उन नए इलाकों तक पहुंचाना है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इसके लिए मुफीद नहीं माना जाता था। यानी, सरकार का फोकस सिर्फ पुराने किसानों पर नहीं, बल्कि नई शुरुआत करने वालों पर ज्यादा है।
सब्सिडी और पौधों की संख्या का पूरा गणित
अब आते हैं सबसे जरूरी बात पर—खर्च कितना आएगा? सरकार ने एक नारियल के पौधे की कीमत ₹85 तय की है। इस पर आपको सीधे 75% की छूट (सब्सिडी) मिलेगी। मतलब, एक पौधे पर ₹63.75 सरकार देगी और बची हुई मामूली सी रकम ही आपको अपनी जेब से भरनी होगी।
सरकार ने पौधों की गिनती को लेकर एक लिमिट जरूर तय की है। एक किसान को कम से कम 5 और ज्यादा से ज्यादा 712 पौधे ही दिए जाएंगे। नियम के मुताबिक, एक हेक्टेयर जमीन में 178 पौधे लगाने का स्टैंडर्ड सेट किया गया है। सीधी सी बात है, जिसके पास जितनी जमीन होगी, उसे उसी अनुपात में पौधे मिलेंगे।
कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना का फायदा उठाने के लिए कुछ बेसिक शर्तें पूरी करनी होंगी:
- आवेदन करने वाला व्यक्ति बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- वह पेशे से किसान हो।
- नारियल की खेती करने में उसकी सच्ची दिलचस्पी हो।
- किसान का रजिस्ट्रेशन बिहार सरकार के DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) पोर्टल पर होना बहुत जरूरी है।
यहां तीसरी शर्त काफी दिलचस्प है। सरकार ने इसमें किसी खास ट्रेनिंग या पुराने अनुभव की मांग नहीं की है। अगर आप नए किसान हैं और नारियल उगाने की सिर्फ इच्छा रखते हैं, तब भी आप बेझिझक फॉर्म भर सकते हैं।
एक बात का खास ख्याल रखें। यह योजना पूरे परिवार (पति-पत्नी और नाबालिग बच्चों) को एक इकाई मानकर दी जाती है। इसका मतलब है कि एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग फॉर्म नहीं भर सकते।
और हां, यहां कोई लॉटरी या मेरिट लिस्ट का चक्कर नहीं है। यह योजना पूरी तरह से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की तर्ज पर काम कर रही है। यानी जो जितनी जल्दी फॉर्म भरेगा, उसे पौधे मिलने के चांस उतने ही ज्यादा होंगे।
किस वर्ग को मिलेगा कितना लाभ?
योजना के तहत अलग-अलग वर्गों के लिए आरक्षण भी तय किया गया है:
| श्रेणी | हिस्सा |
| सामान्य श्रेणी | 78.56% |
| अनुसूचित जाति (SC) | 20% |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 1.44% |
इसके अलावा, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग से 30% का कोटा रखा गया है। यह 30% कोई नई जातिगत श्रेणी नहीं है, बल्कि ऊपर दी गई सभी श्रेणियों की महिला किसानों पर लागू होगा।
फॉर्म भरने के लिए किन कागजातों की जरूरत पड़ेगी?
फॉर्म भरने की प्रक्रिया दो हिस्सों में पूरी होती है, इसलिए आपको कागजात भी उसी हिसाब से तैयार रखने होंगे:
DBT रजिस्ट्रेशन के लिए चाहिए:
- आधार कार्ड (जो चालू मोबाइल नंबर से लिंक हो)
- पासपोर्ट साइज फोटो
- किसान की पर्सनल डिटेल्स
- जमीन के कागजात और बैंक खाते की जानकारी
योजना के फाइनल आवेदन के लिए चाहिए:
- पासपोर्ट साइज फोटो
- जमीन का मालिकाना हक दिखाने वाले कागज या लेटेस्ट लगान रसीद
अगर जमीन की रसीद दादा-परदादा के नाम पर है और आपका नाम उसमें साफ नहीं लिखा है, तो आपको अपनी वंशावली (Family Tree) साथ लगानी होगी। इसके अलावा, अगर आप सब्सिडी वाले पौधे ले रहे हैं, तो जिस जमीन पर खेती करनी है, उसका एग्रीमेंट पेपर या रसीद देना भी अनिवार्य है। बिना इसके फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है।
आवेदन करने का सही तरीका क्या है?
फॉर्म भरने का काम पूरी तरह ऑनलाइन है। यह दो स्टेप्स में होता है,पहले DBT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, फिर योजना के लिए मुख्य आवेदन।
स्टेप 1: DBT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
सबसे पहले कृषि विभाग के DBT पोर्टल पर जाएं। वहां आधार वेरिफिकेशन के लिए OTP का ऑप्शन चुनें।
आधार कार्ड के हिसाब से अपना नाम और नंबर डालकर ‘प्रमाणीकरण’ पर क्लिक करें। मोबाइल पर आए OTP को डालकर वेरीफाई करें।
अगर आपके पास किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) है, तो उसकी जानकारी दें और फिर ‘किसान पंजीकरण’ पर क्लिक कर दें।
अब अपनी जमीन, बैंक डिटेल और बाकी जानकारी भरकर सबमिट कर दें। एक बार फिर OTP डालकर कन्फर्म करते ही आपको आपका रजिस्ट्रेशन नंबर (ID) मिल जाएगा।
स्टेप 2: योजना का मुख्य फॉर्म भरना
DBT रजिस्ट्रेशन पूरा होते ही तुरंत फॉर्म नहीं भरा जा सकता। आपको 48 घंटे का इंतज़ार करना होगा।
48 घंटे बाद, आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां दिए गए डिक्लेरेशन बॉक्स पर टिक करें और ‘आवेदन करने के लिए आगे बढ़ें’ बटन दबाएं।
अपना 13 अंकों वाला DBT रजिस्ट्रेशन नंबर डालें और ‘विवरण प्राप्त करें’ पर क्लिक करें। आपकी आधी जानकारी फॉर्म में अपने आप आ जाएगी।
अब बाकी बची हुई डिटेल्स (जैसे पूरा पता और जमीन की जानकारी) भरें और मांगे गए डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें।
अंत में, फाइनल सबमिट करते ही आपको एक ‘एप्लीकेशन नंबर’ मिल जाएगा। इसे कहीं लिखकर रख लें और फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर भविष्य के लिए सुरक्षित कर लें।





