
सरकारी नौकरी का एक बड़ा सुकून यह होता है कि बीमारी या किसी मेडिकल इमरजेंसी के वक्त सरकार आपके साथ खड़ी रहती है। आंध्र प्रदेश सरकार ने इसी सुकून को और पुख्ता करते हुए ‘कर्मचारी स्वास्थ्य योजना’ यानी EHS (Employee Health Scheme) शुरू की है। यह योजना ‘डॉ. YSR आरोग्यश्री हेल्थकेयर ट्रस्ट’ के जरिए चलाई जा रही है। इसका एक ही लक्ष्य है—राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेहतरीन और कैशलेस मेडिकल सुविधा देना।
यह योजना असल में क्या है?
EHS के तहत सरकारी कर्मचारी, पेंशनर और उन पर निर्भर परिवार के सदस्य लिस्टेड या नेटवर्क अस्पतालों में बिल्कुल कैशलेस इलाज करवा सकते हैं। यहां सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि EHS ने पुरानी मेडिकल रीइम्बर्समेंट (Medical Reimbursement) प्रक्रिया को खत्म कर दिया है। पहले कर्मचारी अपनी जेब से पैसा खर्च करते थे और बाद में बिल पास करवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते थे। अब वह सिस्टम पूरी तरह कैशलेस हो गया है। इसके अलावा, अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) मिलने के बाद की देखभाल और पुरानी (क्रॉनिक) बीमारियों का इलाज भी इस योजना का हिस्सा बन गया है।
यह स्कीम आंध्र प्रदेश के नौकरी कर रहे (सेवारत) और रिटायर्ड (पेंशनर) दोनों तरह के कर्मचारियों के लिए है।
इस योजना में किन सुविधाओं का फायदा मिलता है?
सुविधाओं को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है, आइए इन्हें आसान भाषा में समझते हैं:
1. अस्पताल में भर्ती होने पर इलाज:
EHS के तहत आपको नेटवर्क अस्पताल में कैशलेस एडमिशन की सुविधा मिलती है। अगर आप किसी लिस्टेड बीमारी के लिए भर्ती होते हैं, तो डिस्चार्ज होने के बाद 10 दिनों तक इलाज और दवाइयों का खर्च भी योजना में कवर होता है। इतना ही नहीं, अगर छुट्टी मिलने के 30 दिनों के भीतर कोई मेडिकल कॉम्प्लिकेशन (जटिलता) आ जाए, तो उसका इलाज भी कैशलेस ही होगा। साथ ही, लिस्टेड बीमारियों के लिए अस्पताल की OPD में चेकअप (आउटपेशेंट असेसमेंट) भी मुफ्त है।
2. फॉलो-अप सेवाएं:
लिस्टेड इलाजों के बाद डॉक्टर की फीस (कंसल्टेशन), जांच और दवाइयों सहित पूरे 1 साल तक की फॉलो-अप सेवाएं इस पैकेज में शामिल हैं। यह एक बार की सुविधा नहीं, बल्कि पूरे साल भर चलने वाला सपोर्ट है।
3. पुरानी (क्रॉनिक) बीमारियों का इलाज:
जिन लोगों को पहले से कोई लंबी बीमारी (जैसे शुगर, बीपी, थायराइड आदि) है, उनका ओपीडी (OPD) इलाज भी नोटिफाइड अस्पतालों में इस योजना के जरिए कवर किया जाता है, ताकि उन्हें नियमित देखभाल मिल सके।
अस्पताल में कैसा वार्ड मिलेगा? (वेतन श्रेणी के हिसाब से)
अस्पताल में भर्ती होने पर हर किसी को एक जैसा कमरा नहीं मिलता। वार्ड की सुविधा कर्मचारी की सैलरी ग्रेड के हिसाब से तय की गई है:
| स्लैब | वेतन श्रेणी (पे ग्रेड) | वार्ड की सुविधा |
| स्लैब A | पे ग्रेड I से IV तक | अर्ध-निजी (Semi-Private) वार्ड |
| स्लैब B | पे ग्रेड V से XVII तक | अर्ध-निजी (Semi-Private) वार्ड |
| स्लैब C | पे ग्रेड XVIII से XXXII तक | निजी (Private) वार्ड |
सीधे शब्दों में कहें तो सबसे ऊपरी वेतन श्रेणी वाले अधिकारियों को प्राइवेट रूम मिलता है, जबकि बाकी दोनों स्लैब वाले कर्मचारियों को सेमी-प्राइवेट वार्ड की सुविधा दी जाती है।
कितना वित्तीय कवर (पैसा) मिलता है?
EHS एक बार बीमार पड़ने (प्रति एपिसोड) पर ₹2 लाख तक का मेडिकल कवर देता है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। अगर किसी बीमारी के इलाज या पैकेज का खर्च 2 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो ऐसा नहीं है कि इलाज रुक जाएगा। ₹2 लाख से ऊपर के बिल ‘आरोग्यश्री ट्रस्ट’ के CEO के पास मंजूरी के लिए भेजे जाते हैं। यानी बड़े खर्च वाले मामलों में भी सरकार मदद का रास्ता खुला रखती है।
कौन इस योजना का लाभ उठा सकता है?
सेवारत (नौकरी कर रहे) कर्मचारी: राज्य सरकार के सभी पक्के (नियमित) कर्मचारी और लोकल बॉडीज के प्रांतीयकृत (Provincialised) कर्मचारी इसमें आते हैं।
पेंशनर: सभी सर्विस पेंशनर, पारिवारिक पेंशन पाने वाले (Family Pensioners) और दोबारा नियुक्त किए गए (Re-employed) सर्विस पेंशनर इसका फायदा ले सकते हैं।
किन्हें इस योजना से बाहर रखा गया है?
कुछ लोग इस योजना का लाभ नहीं ले सकते:
- जो लोग पहले से ही CGHS, ESIS, रेलवे, RTC, पुलिस की ‘आरोग्य भद्रथा’ या आबकारी विभाग की ‘आरोग्य सहायता’ जैसी किसी और सरकारी बीमा योजना से जुड़े हैं।
- राज्य के विधि अधिकारी जैसे—महाधिवक्ता, राज्य अभियोजक, सरकारी वकील आदि।
- दिहाड़ी या कच्चे कर्मचारी (आकस्मिक और दैनिक वेतनभोगी)।
- गोद लिए गए माता-पिता की स्थिति में, व्यक्ति के सगे (जैविक) माता-पिता।
- नौकरीपेशा और अपने पैरों पर खड़े (आत्मनिर्भर) बच्चे।
- IAS, IPS जैसे अखिल भारतीय सेवा (AIS) अधिकारी और AIS पेंशनर।
रजिस्ट्रेशन के लिए कौन से कागजात चाहिए?
- आधार कार्ड (फोटो और नंबर बिल्कुल साफ दिखने चाहिए)।
- रंगीन पासपोर्ट साइज़ फोटो (200 KB से कम साइज़, 45mm x 35mm ICAO मानकों के अनुसार)।
- विकलांगता प्रमाण पत्र (अगर कोई दिव्यांग है तो)।
- अगर पति/पत्नी भी राज्य सरकार में कर्मचारी या पेंशनर हैं, तो उनकी एम्प्लॉई ID या पेंशनर ID।
- 5 साल से छोटे आश्रित बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र।
ध्यान दें: फोटो का साइज और डाइमेंशन एकदम सही होना चाहिए, वरना फॉर्म अपलोड नहीं होगा और रिजेक्ट हो जाएगा।
सेवारत (वर्तमान) कर्मचारियों के लिए रजिस्ट्रेशन का तरीका
- सबसे पहले EHS वेब पोर्टल पर जाएं। अपनी एम्प्लॉई ID को यूज़रनेम की जगह डालें और पासवर्ड डालकर लॉग-इन करें।
- जो पेज खुलेगा, उसमें अपनी सारी डिटेल्स सही-सही भरें और ‘सहेजें’ (Save) पर क्लिक करें।
- जानकारी भरने के बाद ‘प्रिंट एप्लीकेशन’ पर क्लिक करके फॉर्म की एक कॉपी सेव या प्रिंट कर लें।
- इसके बाद ‘आवेदन जमा करें’ (Submit) पर क्लिक कर दें।
- फॉर्म जमा होते ही यह अप्रूवल के लिए आपके DDO (आहरण और संवितरण अधिकारी) के पास चला जाएगा।
- DDO की जांच और वेरिफिकेशन के बाद आपका EHS हेल्थ कार्ड बन जाएगा। कार्ड डाउनलोड करने के लिए आपको फिर से पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।
पेंशनरों के लिए रजिस्ट्रेशन का तरीका
रिटायर्ड कर्मचारियों (पेंशनरों) के लिए भी ऑनलाइन प्रक्रिया है:
- EHS वेब पोर्टल पर जाएं और लॉग-इन करें। अगर यूज़रनेम/पासवर्ड नहीं पता, तो अपने STO/APPO ऑफिस से पता करें या EHS के टोल-फ्री नंबर 104 पर कॉल करके जानकारी लें।
- लॉग-इन करने के बाद रजिस्ट्रेशन फॉर्म खोलें। इसमें अपना विभाग, STO/APPO ऑफिस और जिले की जानकारी भरें।
- सभी मांगे गए कागजात अटैच करें और डेटा अच्छे से चेक करके ‘जमा करें’ पर क्लिक कर दें।
- सबमिट करने के बाद फॉर्म का प्रिंटआउट लें, उस पर अपने हस्ताक्षर (Sign) करें, उसे स्कैन करके वापस पोर्टल पर अपलोड करें।
- इसके बाद, उस साइन किए हुए फॉर्म की हार्ड कॉपी (प्रिंटआउट) अपने STO/APPO ऑफिस में जाकर जमा कर दें।
फॉर्म सबमिट होते ही आपको SMS या ईमेल आ जाएगा। अगर फॉर्म में कोई गलती हुई और वह रिजेक्ट हो गया, तो आपको उसे सही करके दोबारा जमा करना होगा।
स्रोत और संदर्भ:-
EHS योजना के कार्यान्वयन संबंधी दिशानिर्देश
YSR आरोग्यश्री ट्रस्ट का आधिकारिक पोर्टल





