
सूरत के रमेश भाई पटेल पिछले 12 साल से UAE और Saudi के buyers को fabric export करते आए हैं। इस साल अचानक orders आधे हो गए। West Asia में जो tension चल रही है उसकी वजह से buyers ने payments रोक लीं। Bank जाओ तो कहते हैं कि भाई साहब situation unstable है, guarantee कौन देगा। घर का खर्च है, workers की salary है, machine का EMI है। सब कुछ लटका हुआ है।
ऐसे रमेश भाई सिर्फ सूरत में नहीं हैं। लुधियाना में हैं, कानपुर में हैं, मुरादाबाद में हैं। देश के हर छोटे शहर में हैं।
इन्हीं के लिए सरकार ने May 2026 में एक बड़ा फैसला लिया। नाम है ECLGS 5.0।
ये ECLGS आखिर है क्या, थोड़ा background समझ लो
Emergency Credit Line Guarantee Scheme। नाम थोड़ा heavy लगता है पर idea बिल्कुल simple है। मान लो किसी business को bank से ₹40 लाख चाहिए, लेकिन bank डरता है कि अगर business चुका नहीं पाया तो क्या होगा। तो सरकार बीच में आकर कहती है कि तुम loan दो, अगर ये default हो गया तो हम भरेंगे। बस इतना सा काम करती है ये scheme। Bank का risk कम हो जाता है और loan approve होने के chances काफी बढ़ जाते हैं।
ये scheme पहली बार 2020 में आई थी। COVID की वजह से जब पूरा देश बंद पड़ा था, Atmanirbhar Bharat package के तहत ECLGS launch हुई और लाखों businesses को डूबने से बचाया था। अब उसका पाँचवाँ version आ गया है और इस बार target है West Asia crisis से damaged हुए businesses।
West Asia की आग का असर भारत के कारोबार पर कैसे पड़ा
ये समझना ज़रूरी है क्योंकि बहुत लोग सोचते हैं कि Middle East की tension से हमें क्या लेना देना। सच ये है कि भारत के बहुत सारे exporters के clients Gulf region में हैं। Textiles, engineering goods, auto parts, leather goods, इन सबका एक बड़ा हिस्सा Middle East जाता है। जब वहाँ situation खराब होती है तो orders cancel होते हैं और payments रुकती हैं।
Airlines की situation अलग किस्म की है। Routes या तो बंद हो जाते हैं या बहुत लंबे हो जाते हैं। Fuel costs बढ़ती हैं। एक flight जो पहले 4 घंटे में destination पर पहुँचाती थी वो अब 6 से 7 घंटे लेती है। इसका सीधा असर revenue पर पड़ता है।
मैंने notice किया है कि इस तरह के global shocks में हमेशा वही लोग सबसे पहले तकलीफ में आते हैं जिनके पास cash का buffer कम होता है। बड़ी companies के पास reserves होते हैं लेकिन छोटा कारोबारी महीने दर महीने चलता है। एक महीना orders रुके नहीं कि सब हिल जाता है।
ECLGS 5.0 का पूरा हिसाब, कितना मिलेगा और किसको
Cabinet ने ₹2.55 लाख करोड़ के credit flow को facilitate करने की मंजूरी दी है। Loans देने का काम banks और financial institutions करेंगी और guarantee देगी NCGTC यानी National Credit Guarantee Trustee Company Limited।
MSMEs को 100% guarantee मिलेगी। इसका मतलब ये कि अगर कोई MSME loan default हो जाए तो bank का पूरा पैसा सरकार cover करेगी। Non-MSMEs और airlines के लिए ये coverage 90% है।
कितना loan मिलेगा ये भी जानना ज़रूरी है। MSMEs और non-MSMEs को January से March 2026 के बीच जो peak working capital था उसका 20% तक additional credit मिल सकता है। Maximum cap ₹100 करोड़ रखी गई है। Airlines की बात अलग है, उन्हें उसी period की peak outstanding credit का 100% तक मिल सकता है लेकिन maximum ₹1500 करोड़ per borrower तक ही।
और एक बात जो सबसे ज़्यादा अच्छी लगी मुझे, guarantee fee zero है। Processing fee zero है। Pre-payment penalty भी zero है। मतलब extra charges का कोई झंझट नहीं।
Loan चुकाने की timeline क्या है
MSMEs और non-MSMEs के लिए loan tenure 5 साल की है। इसमें पहले 1 साल का moratorium है, यानी पहले साल सिर्फ interest देना है, principal नहीं। Airlines के लिए थोड़ी ज़्यादा छूट है, 7 साल की tenure और 2 साल का moratorium।
ये scheme March 31, 2027 तक valid है। जो भी loans इस date से पहले sanction होंगे वो सब इस scheme के under आएंगे।
Apply कहाँ से होगा, एक important बात
ये बहुत कम लोगों को पता है कि applications सिर्फ Jan Samarth Portal के through होंगी। कोई और रास्ता नहीं है, ये mandatory है। तो अगर आप या आपके जानने वाले MSME owner हैं तो पहले jansamarth.in पर जाओ, register करो, और फिर अपने bank से बात करो।
क्या actually ये scheme उन तक पहुँचती है जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है?
ये सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूँ क्योंकि honestly कहूँ तो ये बात थोड़ी uncomfortable है। एक businessman जो शहर में है, जिसकी CA firm है, bank से regular dealing है, उसके लिए apply करना आसान है। लेकिन जो छोटा manufacturer किसी कस्बे में बैठा है, उसे शायद पता भी नहीं होगा कि ये scheme exist करती है। और यही gap है जो हर बार आता है।
Airlines के लिए अलग provision क्यों रखा
Aviation sector already बहुत thin margins पर चलती है। Fuel का खर्च, landing fees, crew costs, maintenance, सब कुछ बहुत expensive है। West Asia crisis ने कई important routes को या तो बंद करा दिया या significantly longer बना दिया। ₹5000 करोड़ का earmark specifically airlines के लिए इसलिए किया गया है ताकि connectivity बनी रहे। अगर airlines financially struggle करें और routes बंद करें तो सिर्फ passengers को नहीं बल्कि cargo और trade को भी नुकसान होता है जो ultimately फिर से MSMEs को ही affect करता है।
अब तक कितना हुआ काम, numbers देखो
June 9, 2026 तक 1,06,549 guarantees issue हो चुकी थीं। इनकी total value थी ₹48,484.26 करोड़। इसमें से 96% guarantees और 86% guaranteed amount दोनों MSMEs के लिए थे। Public Sector Banks ने 96% guarantees process कीं।
मेरे हिसाब से ये numbers बताते हैं कि scheme सिर्फ announcement नहीं बनी, ground पर काम हो रहा है। ये थोड़ी राहत वाली बात है।
अब आगे क्या करना चाहिए
अगर आप MSME owner हैं और West Asia crisis की वजह से business पर असर पड़ा है तो देरी मत करो। Scheme March 2027 तक है लेकिन banks की processing में time लगती है। Jan Samarth Portal पर जाओ, documents ready रखो। और अगर bank में कोई आनाकानी करे तो NCGTC की website पर जाकर scheme की details खुद पढ़ो ताकि तुम informed होकर बात कर सको।
एक बात और। अगर आपके आस पास कोई ऐसा छोटा business owner है जिसे इस scheme के बारे में नहीं पता तो उसे ये article share करो। जानकारी ही कभी कभी सबसे बड़ी मदद होती है।
और आखिर में एक सवाल आपसे, क्या आपने कभी किसी government scheme का फ़ायदा उठाया है या हमेशा paperwork देखकर छोड़ दिया?





