
1.25 लाख करोड़ रुपये, यह वह रकम है जो अब भारत की semiconductor manufacturing को अगले level पर ले जाने वाली है। Finance Ministry की Expenditure Finance Committee यानी EFC ने India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 के लिए इतने बड़े outlay को हरी झंडी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक NDTV Profit को यह जानकारी मिली है कि proposal पिछले हफ्ते ही EFC से clear हो चुका है, और अब यह final मंजूरी के लिए Union Cabinet के पास जाएगा।
पहले Phase से कितना बड़ा है यह push
ISM 1.0 के तहत सरकार ने कुल 76,000 करोड़ रुपये allocate किए थे, जिसके तहत chip fabrication, assembly और design को मिलाकर 10 semiconductor facilities को मंजूरी मिली थी। अब ISM 2.0 में यह रकम करीब पौने दोगुनी हो गई है। इस growth से साफ पता चलता है कि सरकार semiconductor sector को कितनी गंभीरता से ले रही है।
दिसंबर 2025 तक 6 राज्यों में फैली 10 projects को approve किया जा चुका है, जिनकी total investment value 1.60 लाख करोड़ रुपये है। इसमें silicon fabrication units, silicon carbide fabs, advanced और memory packaging facilities के साथ साथ assembly और testing infrastructure भी शामिल है। गुजरात के Sanand में तो एक pilot production line पहले ही शुरू हो चुकी है, और अगले एक साल के भीतर चार और units production में आने की उम्मीद है।
इस बार सिर्फ बड़ी companies तक सीमित नहीं
ISM 2.0 की एक खास बात यह है कि इसका फायदा सिर्फ बड़े chip makers तक सीमित नहीं रहेगा। यह scheme पूरे ecosystem को cover करेगी, जिसमें industrial gases, specialty chemicals, capital equipment और छोटी MSMEs के साथ साथ ancillary suppliers भी शामिल होंगे। मेरे हिसाब से यही सबसे ज़रूरी बदलाव है, क्योंकि किसी भी बड़ी industry की असली मज़बूती उसके supporting ecosystem से ही आती है, सिर्फ बड़ी factories खड़ी करने से नहीं।
Applied Materials, Lam Research, Merck और Linde जैसी global companies पहले से ही भारत में supporting factories और supply chains में निवेश कर रही हैं। यह दिखाता है कि सिर्फ भारत सरकार ही नहीं, बल्कि global players भी इस momentum को पहचान चुके हैं।
| Parameter | ISM 1.0 | ISM 2.0 |
|---|---|---|
| Outlay | ₹76,000 करोड़ | ₹1.25 लाख करोड़ |
| Approved projects | 10 facilities | Ecosystem-wide विस्तार |
| Investment value (approved projects तक) | – | ₹1.60 लाख करोड़ |
| Target | Chip fabrication, assembly, design | 75% domestic demand by 2030 |
क्या भारत सच में import dependence कम कर पाएगा
सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत अपनी 75% घरेलू semiconductor demand खुद पूरी कर सके, जिससे import पर निर्भरता कम हो और देश global electronics manufacturing hub बनने की दिशा में आगे बढ़े। यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी ज़रूर है, लेकिन क्या यह इतनी जल्दी हासिल हो पाएगा?
सच कहूं तो chip manufacturing कोई ऐसा sector नहीं है जहां रातोंरात नतीजे दिख जाएं। Fab units लगाने में सालों लगते हैं, skilled workforce तैयार करना पड़ता है, और technology में लगातार upgrade की ज़रूरत होती है। सरकार ने खुद 2035 तक top semiconductor nations में शामिल होने और 3-nanometre, 2-nanometre technology nodes तक पहुंचने का roadmap रखा है, जो बताता है कि यह एक long-term game है, quick win नहीं।
Investors और industry के लिए इसका मतलब क्या है
मान लो कोई Noida का electronics component supplier है जो अभी छोटे स्तर पर काम करता है। ISM 2.0 के तहत MSMEs और ancillary suppliers को मिलने वाला support उसके लिए बड़ा मौका बन सकता है, क्योंकि बड़ी fab companies को अपने आसपास एक पूरा supplier network चाहिए होता है। ऐसे में जो छोटी कंपनियां समय रहते खुद को इस ecosystem में जोड़ लेती हैं, उन्हें आने वाले सालों में फायदा मिल सकता है।
Stock market के नज़रिए से देखें तो semiconductor और related ancillary sectors से जुड़े शेयरों पर नज़र रखना समझदारी होगी, खासकर वो companies जो specialty chemicals, industrial gases या capital equipment बनाती हैं। हालांकि किसी भी sector की सरकारी योजना को देखकर तुरंत निवेश का फैसला लेने से पहले, यह ज़रूर परखिए कि company का execution track record कैसा रहा है और यह scheme actual मंजूरी और फंड disbursement तक कैसे पहुंचती है, सिर्फ headline से आगे बढ़कर numbers पर भरोसा कीजिए।





