शनिवार दोपहर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा है।
ये फैसला 36 दिन से जंतर मंतर पर चल रहे धरने के बीच आया, जिसमें एक अनशन भी शामिल था जो अस्पताल तक पहुंच गया था। प्रधान ने अपने X हैंडल पर इस्तीफे की पूरी चिट्ठी शेयर की, जो दो पन्नों की और करीब 575 शब्दों की है।
चिट्ठी में क्या लिखा
चिट्ठी की शुरुआत “मेरे युवा साथियों” संबोधन से हुई। प्रधान ने लिखा कि पिछले चार दशक से ज़्यादा वक्त से वो छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने NEET UG परीक्षा की टाइमलाइन गिनाई। 3 मई 2026 को परीक्षा हुई, अनियमितता सामने आई, CBI को जांच सौंपी गई, परीक्षा रद्द हुई और दोबारा तारीख तय हुई। अगले साल से CBT मोड में परीक्षा कराने का फैसला भी इसी दौरान लिया गया। उनके मुताबिक 20 लाख से ज़्यादा छात्रों की दोबारा परीक्षा सुचारू रूप से हो, यही प्राथमिकता रही। 21 जून 2026 को ये परीक्षा पूरी हुई।
चिट्ठी में एक लाइन ऐसी भी थी, “इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।” चिट्ठी में ये स्पष्ट नहीं किया गया कि ये टिप्पणी किसकी तरफ इशारा कर रही है।
इस्तीफे की वजह क्या बताई गई
प्रधान ने लिखा कि जंतर मंतर और देश में जो हालात बने हैं, उसका फायदा राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, और किसी छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे। उनके मुताबिक बच्चे अपना वक्त पढ़ाई और करियर पर लगाएं, यही सोचकर उन्होंने त्यागपत्र भेजा।
उन्होंने ये भी लिखा कि पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर उनका मन दुखी है, और ये उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है।
जंतर मंतर पर रिएक्शन
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस्तीफे को अपनी जीत बताया। उन्होंने कहा, हमने कर दिखाया, धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। उनके मुताबिक ये साबित करता है कि अगर आप डरते नहीं, झुकते नहीं, तो किसी से भी इस्तीफा दिलवाया जा सकता है।
दीपके ने आगे कहा, वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।
दीपके ने साफ किया कि उनकी दो मांगें अभी बाकी हैं, जिन छात्रों ने आत्महत्या की उनके परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा मिले, और 20 जुलाई के मार्च में लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, दिल्ली पुलिस अधिकारी याद रखें, उन्होंने कॉकरोच से पंगा लिया है, एक मंत्री का इस्तीफा तो हमने ले ही लिया है।

भागवत के बयान और इस्तीफे के बीच का समय
शनिवार सुबह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा था, हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता। उन्होंने ये भी कहा कि नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उन्हें आदेश देने की बजाय बातचीत से समझाना चाहिए।
प्रधान का इस्तीफा भागवत के इस बयान के करीब चार घंटे बाद आया। दोनों घटनाओं के बीच किसी सीधे संबंध की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
घटनाक्रम कैसे आगे बढ़ा
CJP ने जंतर मंतर पर धरना 20 जून से शुरू किया था। इसमें बाद में लद्दाख के शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी शामिल हुए और अनशन पर बैठ गए।
18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को अनशन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल भर्ती करा दिया। वांगचुक और CJP ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च की घोषणा की थी। पुलिस कार्रवाई के बावजूद जंतर मंतर पर भीड़ बढ़ती रही, और 20 जुलाई को जब हज़ारों प्रदर्शनकारी वांगचुक के बिना ही संसद की तरफ बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों की पिटाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए।
इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी कई विपक्षी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। शनिवार सुबह उन्होंने X पर लिखा, मेट्रो बंद करो, रास्ते बंद करो, दुकानें बंद करो, इंटरनेट बंद करो, खाना बंद करो, अपना हक मांग रहे छात्रों के खिलाफ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए। बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए मोदी जी, पेपर लीक। उसी दिन दिल्ली में साढ़े सात बजे से 18 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे। CJP का दावा है कि धरनास्थल के आसपास इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहीं, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई।
एक दिन पहले प्रशासनिक कार्रवाई
शुक्रवार रात NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 47 अधिकारी बर्खास्त किए गए थे, इनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने की बात भी कही गई। इससे एक दिन पहले गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के दो सचिव भी बदले गए थे। अधिकारियों के मुताबिक आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बदलाव और टेस्टिंग सिस्टम में तकनीकी सुधार आगे किए जाएंगे।
1997 का एक पुराना संदर्भ
प्रधान के पुराने सहयोगी प्रशांत राउत के मुताबिक, 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक के मामले में खुद धर्मेंद्र प्रधान ने विरोध प्रदर्शन किया था। उस प्रदर्शन में करीब 1500 छात्र शामिल हुए थे, पुलिस ने लाठीचार्ज किया, और प्रधान को चोटें आई थीं, जिसमें एक फ्रैक्चर भी शामिल था।
मौजूदा कानूनी प्रावधान
जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई अलग केंद्रीय कानून नहीं था, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसी सामान्य धाराओं में केस दर्ज होता था। 21 जून 2024 को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू हुआ। इसके तहत पेपर लीक, मदद करना, फर्जी OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, गैर जमानती अपराध माने गए हैं। पेपर लीक पर 3 से 5 साल जेल और 10 लाख तक जुर्माना, और परीक्षा कराने वाली एजेंसी या उसके अधिकारी दोषी पाए जाएं तो 3 से 10 साल जेल और एक करोड़ तक जुर्माना, ये मौजूदा प्रावधान हैं।
आगे क्या
सोमवार को संसद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश होने वाला है, जिसमें पेपर लीक माफियाओं और दोषी संस्थानों के खिलाफ और कड़ी सज़ा का प्रावधान होगा।
अब तक इस मामले में 13 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। CBI महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली समेत कई राज्यों में जांच कर रही है और जल्द चार्जशीट दाखिल कर सकती है। CJP ने साफ किया है कि मुआवज़े और पुलिस कार्रवाई की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।





