
पशुपालन में सुअर पालन एक ऐसा विकल्प है जो कम निवेश में जल्दी मुनाफा दे सकता है, खासकर अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में जहां सुअर के मांस की मांग हमेशा बनी रहती है। राज्य सरकार के पशुपालन, पशु चिकित्सा और डेयरी विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसी संभावना को भुनाने के लिए एक योजना शुरू की, अरुण सुअर विकास योजना।
योजना है क्या
सुअर पालन को खासतौर पर इसलिए चुना गया क्योंकि इसमें कुछ फायदे और भी पशुधन प्रजातियों से ज्यादा हैं, ऊंची प्रजनन क्षमता, बेहतर फीड रूपांतरण दक्षता, जल्दी परिपक्वता और छोटी पीढ़ी का अंतराल। इसके अलावा सुअर पालन के लिए बड़े निवेश की भी जरूरत नहीं पड़ती, ना इमारतों में और ना उपकरणों में। यही वजह है कि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में सुअर पालन पहले से ही एक लोकप्रिय जीविका का साधन रहा है।
योजना का मकसद कई स्तरों पर फैला हुआ है। एक तरफ विदेशी नस्लों के साथ संकर प्रजनन के जरिए स्वदेशी सूअरों का आनुवंशिक सुधार करना है, तो दूसरी तरफ चुनिंदा प्रजनन के जरिए ग्रामीण लोगों में स्वदेशी सुअर पालन को बेहतर बनाना भी शामिल है। इसके अलावा किसानों के लिए आजीविका कमाने के मौके बढ़ाना, सुनियोजित संकर नस्ल के जानवरों का रखरखाव सुनिश्चित करना, और सुअर पालन से जुड़ा सपोर्ट सिस्टम ग्रामीण इलाकों में फैलाना भी इस योजना का हिस्सा है।
एक जरूरी बात यहां समझ लीजिए, राज्य में जो भी संकर नस्लें तैयार और प्रचारित की जाएंगी, उन्हें स्थानीय पर्यावरण और बदलती जलवायु चुनौतियों के अनुकूल बनाया जाएगा। यानी सिर्फ बाहरी नस्लें लाकर छोड़ना नहीं, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से उन्हें ढालना भी योजना का हिस्सा है।
योजना की खास बातें
आमतौर पर क्रेडिट लिंक्ड स्कीमों में किसानों को कम ब्याज दर तो मिलती है, लेकिन सफलता दर अक्सर कमजोर रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सीधे हस्तक्षेप का रास्ता चुना, ताकि आनुवंशिक संसाधनों का उन्नयन बेहतर तरीके से हो सके। यही सोच बजट घोषणा 2019-20 में इस नई योजना के प्रस्ताव के पीछे थी, जिसका मकसद संभावित जिलों में सुअर पालन के जरिए किसानों का स्थायी विकास और गरीबी उन्मूलन करना है।
कितनी सब्सिडी और सहायता मिलेगी
लाभ की बात करें तो कुल 4,750 किसानों को सुअर सब्सिडी दी जाएगी, जिसमें लाभार्थी का योगदान सिर्फ 25 प्रतिशत होगा और बाकी 75 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी।
सूअरों की खरीद खुद जिला प्रशासन करेगा, और ये तभी किसान को सौंपे जाएंगे जब चयनित किसान एक उपयुक्त स्टाई यानी सुअरबाड़ा बना चुका हो। स्टाई में कम से कम 5 सूअर रखे जा सकें, इतनी जगह होनी चाहिए, साथ ही आगे चलकर 15 और सूअरों तक की गुंजाइश भी होनी चाहिए।
इसके अलावा हर जिले से 5 सुअर उद्यमियों को चुना जाएगा, और हर एक को प्रति यूनिट 15 सुअर के बच्चों की सहायता दी जाएगी, जिसका सरकारी हिस्सा ₹1.5 लाख प्रति यूनिट होगा।
कौन आवेदन कर सकता है
पात्रता की शर्तें इस प्रकार हैं।
- आवेदक अरुणाचल प्रदेश का स्थायी निवासी हो
- सुअर पालन करने वाले व्यक्तिगत किसान या स्वयं सहायता समूह (SHG), जिनकी पहचान जिला सुअर विकास समिति ने की हो, वे आवेदन के पात्र हैं
- महिलाओं और वास्तव में गरीब किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी
दूसरी शर्त पर ध्यान दीजिए, यहां सिर्फ इच्छुक होना काफी नहीं, जिला सुअर विकास समिति द्वारा पहचान होना भी जरूरी है। यानी एक स्क्रीनिंग प्रक्रिया पहले से मौजूद है, जो तय करती है कि कौन इस योजना के लिए पात्र माना जाएगा।
किन दस्तावेज़ों की जरूरत होगी
- पहचान प्रमाण, जैसे आधार कार्ड, वोटर ID वगैरह
- गरीबी रेखा से नीचे (BPL) कार्ड
- तय प्रारूप में आवेदन पत्र और किसान विवरण
- आवेदक का निवास प्रमाण
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
BPL कार्ड यहां खासतौर पर मांगा गया है, जो इस बात का संकेत है कि योजना खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
आवेदन कैसे करें
प्रक्रिया ऑफलाइन है और कुछ सीधे चरणों में पूरी होती है।
स्टेप 1 — आवेदक नजदीकी जिला पशुपालन और पशु चिकित्सा अधिकारी (DAHVO) से संपर्क कर सकता है।
स्टेप 2 — तय प्रारूप में आवेदन पत्र संबंधित पशुपालन और पशु चिकित्सा कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है।
स्टेप 3 — विभाग में आवेदन जमा करने से पहले आवेदक को सुनिश्चित करना चाहिए कि भरी गई सारी जानकारी सही हो।
स्रोत और संदर्भ:-
सुअर पालन योजना से जुड़ी जानकारी
योजना के आधिकारिक दिशा निर्देश





