
शारीरिक कमजोरी या दिव्यांगता के साथ जिंदगी बिताना आसान नहीं होता। और अगर परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक न हो, तो मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। इसी परेशानी को समझते हुए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के समाज कल्याण निदेशालय ने ‘विकलांगता भत्ता योजना’ शुरू की है। इसके तहत 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले लोगों को हर महीने एक बंधी हुई आर्थिक मदद दी जाती है।
आखिर क्या है यह योजना
इस योजना का सीधा सा मकसद उन लोगों को आर्थिक सहारा देना है, जो 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा दिव्यांग हैं। यह कोई एक बार मिलने वाली मदद नहीं है, बल्कि हर महीने मिलने वाली एक पक्की और नियमित सहायता है, जिससे रोजमर्रा के खर्चों में काफी राहत मिलती है।
हर महीने कितना भत्ता मिलेगा
नियम और शर्तें पूरी करने वाले लाभार्थियों को हर महीने ₹2,500 का भत्ता दिया जाता है। यह पैसा उसी महीने से मिलना शुरू होता है, जिस महीने आपका फॉर्म पास (मंजूर) होता है। (यानी फॉर्म पास होने से पहले के महीनों का पैसा नहीं मिलेगा)।
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यह पेंशन लाभार्थी के जीवनभर चलती है। जब तक व्यक्ति जीवित है और वह योजना की शर्तों को पूरा कर रहा है, उसे यह पैसा मिलता रहेगा। पैसे के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ता, यह सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दिया जाता है।
कौन कर सकता है आवेदन
इस भत्ते का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं:
- आवेदन करने वाला व्यक्ति अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का स्थायी निवासी हो, या फिर वह कम से कम 10 साल से यहां रह रहा हो।
- आवेदक की उम्र कम से कम एक महीना हो और उसकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होनी चाहिए।
- आवेदक को सरकार की किसी अन्य योजना से कोई दूसरी पेंशन या वित्तीय सहायता न मिल रही हो।
- आवेदक कहीं नौकरी (रोजगार) न कर रहा हो।
यहां दो बातें बहुत खास हैं। पहली, इस योजना के लिए कोई ‘आय सीमा’ (Income Limit) नहीं है। मतलब परिवार कितना भी कमाता हो, सिर्फ दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर ही यह भत्ता मिल जाएगा। दूसरी बात, उम्र की न्यूनतम सीमा सिर्फ एक महीना रखी गई है। यानी अगर कोई एक महीने का नवजात शिशु भी 40% से ज्यादा दिव्यांगता के साथ जन्मा है, तो उसके लिए भी फॉर्म भरा जा सकता है।
किन स्थितियों में रुक सकता है यह भत्ता
अगर जांच में पता चलता है कि आपने गलत जानकारी या फर्जी कागजात देकर फॉर्म पास करवाया है, तो समाज कल्याण निदेशक किसी भी वक्त इस भत्ते को हमेशा के लिए रद्द कर सकते हैं।
इसके अलावा, अगर भत्ता पाने वाले व्यक्ति को कहीं नौकरी मिल जाती है, तो यह सहायता तुरंत रोक दी जाएगी। इसलिए नौकरी लगने पर तुरंत विभाग को इसकी जानकारी देना जरूरी है, वरना बाद में पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अगर आपके घर का पता बदलता है या रोजगार की स्थिति में कोई बदलाव होता है, तो इसकी सूचना भी कुछ ही दिनों के अंदर समाज कल्याण निदेशक को देनी अनिवार्य है।
फॉर्म भरने के लिए जरूरी दस्तावेज़
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड)
- मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी दिव्यांगता (निशक्तता) प्रमाण पत्र
- निवास प्रमाण पत्र (लोकल सर्टिफिकेट या आइलैंडर कार्ड)। अगर ये दोनों नहीं हैं, तो तहसीलदार द्वारा जारी ऐसा सर्टिफिकेट चलेगा जिसमें लिखा हो कि आप 10 साल से अंडमान निकोबार में रह रहे हैं।
- जाति या समुदाय प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)
- बैंक पासबुक की कॉपी
- एक शपथ पत्र (Affidavit)
- 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए राज्य शिक्षा संस्थान द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र अनिवार्य है।
ध्यान रखें कि मेडिकल (दिव्यांगता) प्रमाण पत्र को हर 5 साल में रिन्यू (नवीनीकृत) करवाना होता है। अगर इसकी वैधता खत्म हो गई, तो आपका भत्ता रुक सकता है। इसलिए समय-समय पर इसे अपडेट करवाते रहें।
आवेदन कैसे करें
इस योजना का फॉर्म भरने की पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन है। आप इसका फॉर्म पोर्ट ब्लेयर स्थित समाज कल्याण निदेशालय या फिर अपने इलाके के CDPO (बाल विकास परियोजना अधिकारी) ऑफिस से बिल्कुल फ्री में ले सकते हैं। अगर आप दफ्तर नहीं जाना चाहते, तो इसे विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जा सकता है।
फॉर्म को अच्छी तरह भरकर और सारे जरूरी कागजात लगाकर उसे पोर्ट ब्लेयर, फेरारगंज, रंगट, डिगलीपुर या कार निकोबार में मौजूद अपने क्षेत्र के CDPO ऑफिस में जमा करना होगा।
फॉर्म जमा करने के बाद मुख्य सेवक या CDPO अधिकारी आपके कागजातों की बारीकी से जांच (वेरिफिकेशन) करते हैं। जब वे संतुष्ट हो जाते हैं, तब इस फॉर्म को फाइनल मंजूरी के लिए निदेशक (समाज कल्याण) के पास भेज दिया जाता है। यानी फॉर्म जमा करते ही पेंशन चालू नहीं होती, बल्कि एक पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही इसे पास किया जाता है।





