40% या ज्यादा दिव्यांगता वाले लोगों के लिए अंडमान निकोबार में हर महीने ₹2500 का भत्ता, कोई आय सीमा नहीं

On: August 11, 2026 3:44 PM

शारीरिक कमजोरी या दिव्यांगता के साथ जिंदगी बिताना आसान नहीं होता। और अगर परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक न हो, तो मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। इसी परेशानी को समझते हुए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के समाज कल्याण निदेशालय ने ‘विकलांगता भत्ता योजना’ शुरू की है। इसके तहत 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले लोगों को हर महीने एक बंधी हुई आर्थिक मदद दी जाती है।

आखिर क्या है यह योजना

इस योजना का सीधा सा मकसद उन लोगों को आर्थिक सहारा देना है, जो 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा दिव्यांग हैं। यह कोई एक बार मिलने वाली मदद नहीं है, बल्कि हर महीने मिलने वाली एक पक्की और नियमित सहायता है, जिससे रोजमर्रा के खर्चों में काफी राहत मिलती है।

हर महीने कितना भत्ता मिलेगा

नियम और शर्तें पूरी करने वाले लाभार्थियों को हर महीने ₹2,500 का भत्ता दिया जाता है। यह पैसा उसी महीने से मिलना शुरू होता है, जिस महीने आपका फॉर्म पास (मंजूर) होता है। (यानी फॉर्म पास होने से पहले के महीनों का पैसा नहीं मिलेगा)।

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यह पेंशन लाभार्थी के जीवनभर चलती है। जब तक व्यक्ति जीवित है और वह योजना की शर्तों को पूरा कर रहा है, उसे यह पैसा मिलता रहेगा। पैसे के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ता, यह सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दिया जाता है।

कौन कर सकता है आवेदन

इस भत्ते का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं:

  • आवेदन करने वाला व्यक्ति अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का स्थायी निवासी हो, या फिर वह कम से कम 10 साल से यहां रह रहा हो।
  • आवेदक की उम्र कम से कम एक महीना हो और उसकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होनी चाहिए।
  • आवेदक को सरकार की किसी अन्य योजना से कोई दूसरी पेंशन या वित्तीय सहायता न मिल रही हो।
  • आवेदक कहीं नौकरी (रोजगार) न कर रहा हो।

यहां दो बातें बहुत खास हैं। पहली, इस योजना के लिए कोई ‘आय सीमा’ (Income Limit) नहीं है। मतलब परिवार कितना भी कमाता हो, सिर्फ दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर ही यह भत्ता मिल जाएगा। दूसरी बात, उम्र की न्यूनतम सीमा सिर्फ एक महीना रखी गई है। यानी अगर कोई एक महीने का नवजात शिशु भी 40% से ज्यादा दिव्यांगता के साथ जन्मा है, तो उसके लिए भी फॉर्म भरा जा सकता है।

किन स्थितियों में रुक सकता है यह भत्ता

अगर जांच में पता चलता है कि आपने गलत जानकारी या फर्जी कागजात देकर फॉर्म पास करवाया है, तो समाज कल्याण निदेशक किसी भी वक्त इस भत्ते को हमेशा के लिए रद्द कर सकते हैं।

इसके अलावा, अगर भत्ता पाने वाले व्यक्ति को कहीं नौकरी मिल जाती है, तो यह सहायता तुरंत रोक दी जाएगी। इसलिए नौकरी लगने पर तुरंत विभाग को इसकी जानकारी देना जरूरी है, वरना बाद में पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अगर आपके घर का पता बदलता है या रोजगार की स्थिति में कोई बदलाव होता है, तो इसकी सूचना भी कुछ ही दिनों के अंदर समाज कल्याण निदेशक को देनी अनिवार्य है।

फॉर्म भरने के लिए जरूरी दस्तावेज़

  1. पासपोर्ट साइज़ फोटो
  2. पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड)
  3. मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी दिव्यांगता (निशक्तता) प्रमाण पत्र
  4. निवास प्रमाण पत्र (लोकल सर्टिफिकेट या आइलैंडर कार्ड)। अगर ये दोनों नहीं हैं, तो तहसीलदार द्वारा जारी ऐसा सर्टिफिकेट चलेगा जिसमें लिखा हो कि आप 10 साल से अंडमान निकोबार में रह रहे हैं।
  5. जाति या समुदाय प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)
  6. बैंक पासबुक की कॉपी
  7. एक शपथ पत्र (Affidavit)
  8. 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए राज्य शिक्षा संस्थान द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र अनिवार्य है।

ध्यान रखें कि मेडिकल (दिव्यांगता) प्रमाण पत्र को हर 5 साल में रिन्यू (नवीनीकृत) करवाना होता है। अगर इसकी वैधता खत्म हो गई, तो आपका भत्ता रुक सकता है। इसलिए समय-समय पर इसे अपडेट करवाते रहें।

आवेदन कैसे करें

इस योजना का फॉर्म भरने की पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन है। आप इसका फॉर्म पोर्ट ब्लेयर स्थित समाज कल्याण निदेशालय या फिर अपने इलाके के CDPO (बाल विकास परियोजना अधिकारी) ऑफिस से बिल्कुल फ्री में ले सकते हैं। अगर आप दफ्तर नहीं जाना चाहते, तो इसे विभाग की ऑफिशियल वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जा सकता है।

फॉर्म को अच्छी तरह भरकर और सारे जरूरी कागजात लगाकर उसे पोर्ट ब्लेयर, फेरारगंज, रंगट, डिगलीपुर या कार निकोबार में मौजूद अपने क्षेत्र के CDPO ऑफिस में जमा करना होगा।

फॉर्म जमा करने के बाद मुख्य सेवक या CDPO अधिकारी आपके कागजातों की बारीकी से जांच (वेरिफिकेशन) करते हैं। जब वे संतुष्ट हो जाते हैं, तब इस फॉर्म को फाइनल मंजूरी के लिए निदेशक (समाज कल्याण) के पास भेज दिया जाता है। यानी फॉर्म जमा करते ही पेंशन चालू नहीं होती, बल्कि एक पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही इसे पास किया जाता है।

संदर्भ (References):-

योजना संबंधी दिशा निर्देश

विभागीय वेबसाइट

FAQs:-

इस योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य अंडमान और निकोबार में 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र लोगों को नियमित वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
इस योजना के तहत कितनी वित्तीय सहायता मिलती है?
पात्र लाभार्थियों को ₹2,500 प्रति माह का दिव्यांग भत्ता दिया जाता है।
वित्तीय सहायता कितने समय तक मिलती है?
निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने पर वित्तीय सहायता लाभार्थी की मृत्यु तक जारी रह सकती है।
अगर लाभार्थी की मृत्यु हो जाए तो क्या होगा?
लाभार्थी की मृत्यु होने पर दिव्यांग भत्ते का भुगतान समाप्त कर दिया जाता है।
दिव्यांग भत्ता कब से मिलना शुरू होता है?
भत्ता उस महीने से मिलना शुरू होता है, जिस महीने आवेदन को मंजूरी दी जाती है।
दिव्यांग भत्ता कैसे दिया जाता है?
भत्ता हर महीने सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है।
इस योजना के लिए कौन पात्र है?
अंडमान और निकोबार का स्थायी निवासी या कम से कम 10 वर्षों से वहां रह रहा व्यक्ति, जिसकी उम्र कम से कम एक महीना हो, दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो, किसी अन्य सहायता का लाभ न ले रहा हो और नौकरी में न हो, इस योजना के लिए पात्र हो सकता है।
किन परिस्थितियों में दिव्यांग भत्ता रद्द हो सकता है?
गलत आधार या गलत जानकारी के आधार पर सहायता स्वीकृत होने या बाद में पात्रता की शर्तें पूरी न करने की स्थिति में भत्ता रद्द किया जा सकता है।
दिव्यांग भत्ता रद्द करने का अधिकार किसके पास है?
सहायता रद्द करने का अधिकार निदेशक (समाज कल्याण) के पास है।
आवेदन का सत्यापन कैसे किया जाता है?
आवेदन का सत्यापन मुख्य सेवकों या संबंधित CDPO द्वारा काउंटर हस्ताक्षर के माध्यम से किया जाता है। इसके बाद आवेदन मंजूरी के लिए निदेशक के पास भेजा जाता है।
पता या रोजगार की स्थिति बदलने पर क्या करना होगा?
लाभार्थी को अपनी पता या रोजगार संबंधी स्थिति में बदलाव होने पर निर्धारित समय के भीतर समाज कल्याण निदेशक को इसकी सूचना देना अनिवार्य है।
इस योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
आवेदन पत्र समाज कल्याण निदेशालय या CDPO कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। इसे वेबसाइट से डाउनलोड करके भी भरा जा सकता है और संबंधित CDPO कार्यालय में जमा करना होता है।
क्या दिव्यांगता प्रमाणपत्र को नवीनीकृत करना जरूरी है?
हां, दिव्यांगता प्रमाणपत्र को हर पांच वर्ष में नवीनीकृत करना आवश्यक है।
क्या 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं?
नहीं, इस योजना के लिए कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता होना अनिवार्य है।
इस योजना के लिए न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा क्या है?
लाभार्थी की न्यूनतम आयु एक महीना निर्धारित है। उपलब्ध जानकारी में अधिकतम आयु सीमा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

Vivek

Experience:
Covers the Indian Stock Market, IPOs, Mutual Funds, Corporate Announcements, and Business News.
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