Accenture की एक खबर और भारत के IT शेयर 6 प्रतिशत धड़ाम, Sensex 600 अंक टूटा पर हफ्ते का अंत फिर भी हरा रहा

On: June 26, 2026 11:50 AM

घर में बिजली का बिल आता है तो हम सोचते हैं कि हमारी जेब पर असर पड़ा। लेकिन बाज़ार में एक अमेरिकी कंपनी कुछ बोलती है और हज़ारों किलोमीटर दूर भारत में लाखों लोगों की बचत एक दिन में पतली हो जाती है।

यही हुआ उस दिन।

और जिन्होंने IT कंपनियों में पैसा लगाया हुआ था उनके लिए वो दिन ठीक नहीं था।


बाज़ार में क्या गिरा, कितना गिरा

सेंसेक्स उस दिन करीब 600 अंक टूटकर 76,802 पर आकर बंद हुआ। निफ्टी भी नीचे खिसका और 24,013 के स्तर पर रुका।

600 अंक की गिरावट एक दिन में बड़ी मानी जाती है। यह कोई धीमी रिसन नहीं थी, यह एक झटके में आई गिरावट थी। और इसकी वजह भारत में नहीं बल्कि बाहर थी।


Accenture ने ऐसा क्या कहा कि यहाँ तक आग लग गई

Accenture दुनिया की बड़ी IT और सलाह देने वाली कंपनियों में से एक है। उसने अपने पूरे साल की कमाई का अनुमान घटाया यानी पहले जितनी कमाई की उम्मीद जताई थी उससे कम होने की बात कही।

अब सोचो। Accenture अमेरिकी कंपनी है। उसकी कमाई घटने से भारत को क्यों तकलीफ हो?

बात सीधी है। Infosys, TCS, Wipro जैसी हमारी IT कंपनियाँ अपना ज़्यादातर काम विदेशी कंपनियों से लेती हैं। जब Accenture जैसी बड़ी कंपनी कहती है कि कारोबार उम्मीद से कम रहेगा तो इसका मतलब है कि दुनिया भर में IT पर खर्च सिकुड़ रहा है। कम खर्च मतलब भारतीय IT कंपनियों को कम काम। कम काम मतलब कम कमाई। और यही डर निवेशकों को बेचने पर मजबूर करता है।

यह सिलसिला देखते देखते शुरू होता है और घंटों में बहुत नुकसान हो जाता है।


Infosys को सबसे ज़्यादा चोट लगी, 6.6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट

उस दिन IT कंपनियों में Infosys सबसे ज़्यादा टूटी। एक ही दिन में 6.6 प्रतिशत से ज़्यादा नीचे। यह बड़ी बात है।

Infosys बड़े विदेशी ग्राहकों पर बहुत निर्भर है। जब वैश्विक IT खर्च घटने के संकेत आते हैं तो निवेशक सबसे पहले उन्हीं कंपनियों से हाथ खींचते हैं जो उस खर्च पर सबसे ज़्यादा टिकी हों।

हैदराबाद में एक परिचित हैं जो एक छोटी IT कंपनी चलाते हैं। उन्होंने उस दिन फोन पर कहा, “यार जब Accenture छींकती है तो हम जैसों को निमोनिया हो जाता है।” उनकी बात में बहुत सच्चाई थी। बड़ी विदेशी कंपनियाँ जब खर्च काटती हैं तो सबसे पहले बाहरी IT ठेकेदारों की ज़रूरत कम होती है, और भारतीय IT कंपनियाँ उसी काम पर टिकी हैं।


फिर भी पूरे हफ्ते का हिसाब हरा रहा

यहाँ एक मोड़ है जो ज़रूरी है जानना।

जिस हफ्ते यह गिरावट आई उसे पूरा देखें तो निफ्टी ने 1.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ सप्ताह खत्म किया। बैंक निफ्टी भी 1.53 प्रतिशत ऊपर रहा और 57,685.75 पर बंद हुआ।

मतलब सप्ताह के शुरुआती दिनों में बाज़ार काफी ऊपर था। उसी ऊँचाई की वजह से एक दिन की बड़ी गिरावट के बाद भी पूरे हफ्ते का नतीजा सकारात्मक निकला।

यह बात उन लोगों के लिए है जो एक दिन की खबर देखकर घबरा जाते हैं और बेचने का फैसला कर लेते हैं।


एक दिन का हिसाब और पूरे हफ्ते की तस्वीर, दोनों बहुत अलग होते हैं

मैंने notice किया है कि नए निवेशक एक दिन की गिरावट पर बहुत ज़्यादा घबरा जाते हैं। 600 अंक गिरे तो सब बेच दिया। अगले दिन वापस चढ़ा तो पछताए। यह गलती बार बार होती है।

बाज़ार में रोज़ उतार चढ़ाव होता है। एक दिन की गिरावट किसी कंपनी का असली कारोबार नहीं बदलती। जो कंपनी कल अच्छी थी वो आज की गिरावट के बाद भी अच्छी है, बशर्ते उसके बुनियादी कामकाज में कोई सच्ची समस्या न हो।

तो क्या IT कंपनियों के बुनियादी कामकाज में कोई सच्ची समस्या है? यही असली सवाल है।


IT शेयरों की यह कमज़ोरी कितने वक्त तक रहेगी?

इसका पक्का जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन कुछ बातें हैं जो आगे की राह तय करेंगी।

पहली बात, अमेरिका और यूरोप में IT पर खर्च का रुझान। अगर बड़ी कंपनियाँ खर्च काटती रहीं तो भारतीय IT कंपनियों पर दबाव बना रहेगा।

दूसरी बात, Artificial Intelligence का असर। बहुत सी कंपनियाँ अब AI से काम करवा रही हैं जो पहले इंसान करते थे। इससे IT कंपनियों के काम की माँग पर असर पड़ रहा है।

तीसरी बात, भारतीय IT कंपनियों के अगली तिमाही के नतीजे। अगर Infosys, TCS और Wipro अच्छे नतीजे दिखाते हैं तो बाज़ार का डर कम होगा।


बैंकिंग क्षेत्र ने थामी नाव

एक अच्छी बात यह रही कि जिस हफ्ते IT टूटा उसी हफ्ते बैंकिंग क्षेत्र ने बाज़ार को संभाले रखा। बैंक निफ्टी की 1.53 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त बताती है कि देश के भीतर का कारोबार अभी भी ठीक चल रहा है।

जब एक क्षेत्र कमज़ोर होता है और दूसरा मज़बूत रहता है तो बाज़ार खुद को संभाल लेता है। यही वजह है कि हफ्ते का नतीजा हरा रहा।


निवेशकों के लिए एक सीधी बात

अगर तुम्हारे पास IT कंपनियों के शेयर हैं और तुम लंबे वक्त के लिए रखे हो तो एक दिन की गिरावट पर घबराहट में बेचना नुकसान का सौदा है।

लेकिन अगर तुमने हाल ही में IT शेयर खरीदे हैं और सोच रहे हो कि अब क्या करूँ, तो यह देखो कि अगली तिमाही के नतीजे कैसे आते हैं। उसके बाद फैसला करना ज़्यादा समझदारी होगी।

और अगर तुम अभी IT शेयर खरीदने की सोच रहे हो तो यह गिरावट एक मौका भी हो सकती है, बशर्ते तुम लंबे वक्त के लिए सोच रहे हो और कंपनी के बुनियादी कामकाज पर तुम्हारा भरोसा हो।

बाज़ार का डर और लालच दोनों मिलकर नुकसान करते हैं। इनसे बचकर रहो।

तुम्हारे पास IT कंपनियों के शेयर हैं क्या? और उस दिन की गिरावट पर तुमने क्या किया, रोके रखा या बेच दिया?

Vivek

Experience:
Covers the Indian Stock Market, IPOs, Mutual Funds, Corporate Announcements, and Business News.
3+ Years covering Indian Financial Markets.

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