अरुण सुअर विकास योजना: अरुणाचल प्रदेश में सुअर पालकों को मिलेगी 75 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी

On: August 21, 2026 6:35 PM

अरुणाचल प्रदेश में सुअर पालना कोई नई बात नहीं है। यह यहाँ की पुरानी परंपरा होने के साथ साथ हजारों परिवारों की रोजी रोटी चलाने का सबसे बड़ा जरिया भी है। राज्य के खानपान में पोर्क (सुअर का मांस) की मांग हमेशा बनी रहती है। यही कारण है कि गांव देहात के गरीब परिवार सालों से इस काम से जुड़े हैं। लोगों के इसी पुश्तैनी काम को एक पक्का और मुनाफे वाला बिजनेस बनाने के लिए पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग ने साल 2019-20 में ‘अरुण सुअर विकास योजना’ शुरू की थी।

आखिर क्या है यह योजना

इस स्कीम को मुख्य रूप से सुअर पालन का काम बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अगर हम गाय, भैंस या बकरी से इसकी तुलना करें, तो सुअर पालन में किसानों को कम समय में कहीं ज्यादा मुनाफा होता है। इसका कारण एकदम साफ है। इनकी पैदावार अच्छी होती है, ये तेजी से बढ़ते हैं और बहुत कम समय में वजन पकड़ लेते हैं। इनकी अगली पीढ़ी भी जल्दी तैयार हो जाती है।

सबसे अच्छी बात यह है कि सुअर पालने के लिए आपको कोई पक्का और बड़ा मकान या महंगी मशीनें नहीं चाहिए। छोटे और गरीब किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं। सरकार ने इस योजना को सीधे लागू किया है ताकि बैंक लोन के लंबे चक्करों में पड़े बिना किसानों तक सीधा पैसा पहुंच सके।

इस योजना का असली मकसद

अरुण सुअर विकास योजना का काम सिर्फ पैसा बांटकर हाथ झाड़ लेना नहीं है। सरकार का असली लक्ष्य विदेशी नस्लों के साथ क्रॉस ब्रीडिंग कराकर अरुणाचल के देसी सुअरों की नस्ल को और भी बेहतर बनाना है। इससे गांव देहात में सुअर पालन का काम सुधरेगा और किसानों की आमदनी का एक पक्का रास्ता खुलेगा।

किसानों को सही ट्रेनिंग भी दी जा रही है ताकि वे क्रॉस ब्रीड जानवरों को अच्छे और वैज्ञानिक तरीके से पाल सकें। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि राज्य में पैदा होने वाली नई नस्लें यहां के मौसम और बदलते पर्यावरण में आसानी से ढल जाएं। चारे और रहने की जगह के साथ साथ सुअर के मांस की मार्केटिंग और उसे सही दाम पर बेचने के सिस्टम को भी मजबूत किया जा रहा है।

योजना की कुछ बड़ी बातें

यह कोई ऐसी स्कीम नहीं है जिसमें एक बार मदद की और बात खत्म। इसे लंबे समय तक चलने वाले एक विकास मॉडल की तरह बनाया गया है। पशुपालन विभाग सीधे तौर पर नजर रखकर राज्य के अलग अलग जिलों में सुअर पालन को एक बड़े उद्योग का रूप दे रहा है। इसका सीधा असर गरीबी मिटाने और किसानों को आगे बढ़ाने पर पड़ेगा। सरकार बढ़िया ब्रीडिंग के जरिए देसी सुअर पालन को अपग्रेड कर रही है। इससे नई नस्लें अरुणाचल के स्थानीय माहौल में बिना बीमार पड़े आसानी से पल सकेंगी।

किसानों को कितना फायदा होगा

इस योजना में किसानों को मिलने वाली आर्थिक मदद सच में काफी बड़ी है:

  • सरकार राज्य के कुल 4,750 किसानों को सुअर खरीदने पर सब्सिडी दे रही है। इसमें किसान को अपनी जेब से सिर्फ 25 प्रतिशत पैसा लगाना होगा। बाकी का पूरा 75 प्रतिशत खर्च सरकार खुद उठाएगी।
  • सूअरों की खरीद सीधे जिला प्रशासन करेगा। लेकिन किसानों को सुअर तभी दिए जाएंगे, जब वे अपने खेतों में एक सही और सुरक्षित सुअरबाड़ा तैयार कर लेंगे।
  • सुअरबाड़ा ऐसा होना चाहिए जिसमें कम से कम 5 सुअर आराम से रह सकें। साथ ही जरूरत पड़ने पर 15 और सूअरों को रखने की जगह भी होनी चाहिए।
  • हर जिले से 5 सुअर उद्यमियों को चुना जाएगा। हर एक को अपनी यूनिट के लिए 15 सुअर के बच्चे मिलेंगे। इसके लिए सरकार प्रति यूनिट डेढ़ लाख रुपये की मदद देगी।

किसे मिलेगा इस योजना का लाभ

इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं:

  1. अप्लाई करने वाला व्यक्ति अरुणाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  2. जो किसान पहले से सुअर पाल रहे हैं या फिर कोई स्वयं सहायता समूह (SHG), जिसे ‘जिला सुअर विकास समिति’ ने मान्यता दी हो, वे इसका फॉर्म भर सकते हैं।
  3. इस योजना में महिलाओं और सच में गरीब तबके के किसानों को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाएगी।

एक बात और, यह योजना सिर्फ अकेले काम करने वाले किसानों के लिए नहीं है। अगर कुछ महिलाएं या लोग मिलकर (SHG के रूप में) काम करना चाहते हैं, तो वे भी 75% सब्सिडी का फायदा उठाकर अपना सामूहिक काम शुरू कर सकते हैं।

आवेदन कैसे करें

इस योजना के लिए फॉर्म भरने की पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन ही रखी गई है। फॉर्म भरने के लिए आपको सबसे पहले अपने जिले के पशुपालन और पशु चिकित्सा अधिकारी (DAHVO) के ऑफिस जाना होगा। वहां से आपको इस योजना का एप्लीकेशन फॉर्म मिल जाएगा। फॉर्म भरते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि कोई भी जानकारी गलत या आधी अधूरी न हो, वरना फॉर्म रिजेक्ट हो जाएगा।

फॉर्म के साथ लगने वाले जरूरी कागजात

दफ्तरों के बार बार चक्कर काटने से बचने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप फॉर्म लेने जाते समय ही अपने कुछ जरूरी कागजातों की फोटोकॉपी साथ रखें:

  1. पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी)
  2. बीपीएल (BPL) का राशन कार्ड
  3. पते का सुबूत यानी निवास प्रमाण पत्र
  4. हाल ही में खींची गई पासपोर्ट साइज़ फोटो
  5. सही तरीके से भरा हुआ आवेदन पत्र (जो दफ्तर से मिलेगा)

स्रोत और संदर्भ:-

सुअर पालन योजना की जानकारी

सरकारी योजना पुस्तिका

FAQs:-

यह योजना कब शुरू की गई थी?
यह योजना वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान शुरू की गई थी।
इस योजना को किस विभाग ने शुरू किया है?
अरुणाचल प्रदेश सरकार के पशुपालन, पशु चिकित्सा और डेयरी विकास विभाग द्वारा इस योजना की शुरुआत की गई थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
योजना का उद्देश्य सुअर पालन को बढ़ावा देना, स्वदेशी सूअरों की नस्ल में सुधार करना और किसानों की आय व आजीविका को बेहतर बनाना है।
कितने किसानों को सुअर पालन के लिए सब्सिडी मिलेगी?
इस योजना के तहत कुल 4,750 किसानों को सब्सिडी देने का प्रावधान है।
योजना में किसान और सरकार का योगदान कितना है?
लाभार्थी को कुल लागत का 25 प्रतिशत योगदान देना होगा, जबकि सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत रहेगी।
योजना के लिए सूअरों की खरीद कौन करेगा?
लाभार्थियों के लिए सूअरों की खरीद की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
हर जिले में कितने सुअर उद्यमियों का चयन होगा?
योजना के तहत प्रत्येक जिले से 5 सुअर उद्यमियों का चयन किया जाएगा।
सुअर पालन योजना के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
अरुणाचल प्रदेश के स्थायी निवासी व्यक्तिगत किसान और स्वयं सहायता समूह यानी SHG से जुड़े किसान पात्र हो सकते हैं, जिनकी पहचान जिला सुअर विकास समिति द्वारा की गई हो।
क्या कुछ लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी?
हां, योजना में महिलाओं और आर्थिक रूप से वास्तव में जरूरतमंद किसानों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।
योजना की जानकारी के लिए कहां संपर्क करें?
अधिक जानकारी या सहायता के लिए आवेदक अपने नजदीकी जिला पशुपालन और पशु चिकित्सा अधिकारी यानी DAHVO से संपर्क कर सकते हैं।

Vivek

Experience:
Covers the Indian Stock Market, IPOs, Mutual Funds, Corporate Announcements, and Business News.
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