
उम्र के एक पड़ाव पर जब पति का साथ छूट जाता है, तो अकेले घर चलाना किसी भी महिला के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। और अगर परिवार पहले से ही गरीबी से जूझ रहा हो, तो परेशानियां और भी बढ़ जाती हैं। महिलाओं की इसी परेशानी और मजबूरी को दूर करने के लिए बिहार का समाज कल्याण विभाग ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना’ चला रहा है। वैसे तो यह केंद्र सरकार की योजना है, लेकिन इसे बिहार में भी बहुत अच्छे से लागू किया गया है।
योजना का मकसद क्या है
इस योजना का सीधा सा लक्ष्य गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन बिता रही विधवा महिलाओं को हर महीने एक पक्का आर्थिक सहारा देना है। यह कोई ऐसी मदद नहीं है जो एक बार मिलकर बंद हो जाए, बल्कि यह हर महीने मिलने वाली पेंशन है। इससे पति के गुज़र जाने के बाद महिला को अपनी छोटी मोटी जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।
हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी
इस स्कीम में चुनी गई महिलाओं को हर महीने 400 रुपये की पेंशन दी जाती है। यह पैसा सीधे महिला के बैंक खाते में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के ज़रिए भेजा जाता है। इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि पैसा राज्य सरकार के सिस्टम से सीधे आपके अकाउंट में आता है। बीच में कोई एजेंट या बिचौलिया नहीं होता, इसलिए किसी को भी कमीशन देने का झंझट नहीं है।
कौन ले सकता है इस पेंशन का लाभ
इस पेंशन का फायदा उठाने के लिए कुछ जरूरी नियम तय किए गए हैं:
- आवेदन करने वाली महिला बिहार की स्थायी निवासी होनी चाहिए।
- महिला का विधवा होना अनिवार्य है।
- महिला की उम्र 40 से 79 साल के बीच होनी चाहिए।
- महिला का परिवार गरीबी रेखा के नीचे (BPL) आता हो।
- महिला को पहले से किसी दूसरी सरकारी पेंशन योजना का लाभ न मिल रहा हो।
यहां आखिरी नियम पर थोड़ा ध्यान दें। अगर आपको सरकार की किसी और योजना से पहले ही पेंशन मिल रही है, तो आप इसके लिए फॉर्म नहीं भर सकतीं। सरकार ने यह नियम इसलिए रखा है ताकि कोई भी एक ही समय में दो योजनाओं का फायदा न उठा सके। इसके अलावा उम्र का भी खास ख्याल रखें। यह पेंशन सिर्फ 40 से 79 साल तक की महिलाओं के लिए ही है। अगर उम्र 40 से एक दिन भी कम है या 79 से ज्यादा है, तो आपका फॉर्म रिजेक्ट हो जाएगा।
फॉर्म के साथ कौन से कागज़ लगेंगे
फॉर्म भरने से पहले इन सभी ज़रूरी कागज़ातों को अपने पास इकट्ठा कर लें:
- आधार कार्ड
- हाल ही में खींची गई पासपोर्ट साइज़ फोटो
- पहचान पत्र (जैसे वोटर आईडी)
- पति का मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट)
- निवास प्रमाण पत्र
- उम्र का सुबूत
- BPL कार्ड
- जाति प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)
- बैंक पासबुक की कॉपी
- जरूरत पड़ने पर कोई अन्य कागज़ात
इन सबमें पति का डेथ सर्टिफिकेट और BPL कार्ड सबसे ज़्यादा ज़रूरी हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आपके फॉर्म की जांच होती है। इसलिए आवेदन की शुरुआत करने से पहले इन दोनों डॉक्युमेंट्स को पक्के तौर पर तैयार करवा लें।
आवेदन का सही तरीका क्या है
इस योजना के लिए फॉर्म ऑनलाइन नहीं भरा जाता, इसकी पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन रखी गई है।
स्टेप 1 — सबसे पहले अपने ब्लॉक (प्रखंड) कार्यालय में मौजूद RTPS काउंटर पर जाएं। वहां से इस योजना का फॉर्म लें, उसे सही सही भरें और सभी ज़रूरी कागज़ात लगाकर वहीं जमा कर दें।
स्टेप 2 — फॉर्म जमा करते ही आपको RTPS काउंटर से एक रसीद (Receiving) मिलेगी। इसे बहुत संभाल कर रखें।
स्टेप 3 — आपके फॉर्म को मंज़ूरी मिली या वह रिजेक्ट हो गया, इसकी जानकारी आपको फोन पर SMS या ईमेल के ज़रिए मिल जाएगी।
स्टेप 4 — अगर आपका फॉर्म पास हो जाता है, तो आप उसी RTPS काउंटर पर जाकर अपना स्वीकृति पत्र ले सकती हैं। इसके लिए आपको बस वो पुरानी रसीद और अपना आधार कार्ड दिखाना होगा।
फॉर्म जमा करने के बाद मिली रसीद को भूलकर भी न खोएं। जब तक आपकी पेंशन चालू नहीं हो जाती, तब तक अपने फॉर्म का स्टेटस चेक करने के लिए यही रसीद काम आएगी।
कोई दिक्कत आए तो शिकायत कहां करें
सरकारी दफ्तरों में अक्सर लोगों को लगता है कि सिर्फ चक्कर काटने पड़ेंगे। लेकिन अगर आपका फॉर्म बेवजह अटकाया जा रहा है, तो आप आसानी से शिकायत कर सकती हैं। आप sspmis.bihar.gov.in पोर्टल पर जाकर खुद ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती हैं। इसके अलावा सरकार के टोल फ्री नंबर 18003456262 पर कॉल करके भी फ्री में अपनी शिकायत नोट करवाई जा सकती है।
इसके अलावा आप अपने ब्लॉक के BDO या अनुमंडल कार्यालय में जाकर भी अपनी बात रख सकती हैं। जिला स्तर पर सामाजिक सुरक्षा प्रकोष्ठ के अधिकारियों को भी शिकायत दी जा सकती है। इतना ही नहीं, ‘बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2016’ के तहत आपको कानूनी अधिकार भी मिला हुआ है। आप अनुमंडल या जिले के ‘लोक शिकायत निवारण अधिकारी’ के पास अपना मामला ले जा सकती हैं। इसलिए अगर काम होने में बिना वजह देरी हो, तो अपने इन अधिकारों का इस्तेमाल बेझिझक करें।





