स्कूल न जाने वाली 11 से 14 साल की बेटियों के लिए बिहार में खास योजना, हर महीने मुफ्त राशन के साथ स्किल ट्रेनिंग भी

On: August 4, 2026 4:17 PM

हर बच्ची स्कूल तक नहीं पहुंच पाती, ये सच्चाई है। कभी घर की मजबूरी, कभी दूरी, कभी कोई और वजह, कुछ लड़कियां स्कूल से बाहर रह जाती हैं। बिहार में ऐसी ही किशोरियों के लिए 2011 से एक योजना चल रही है, नाम है किशोर लड़कियों के लिए योजना, जो एकीकृत बाल विकास परियोजना यानी ICDS के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए लागू की जाती है।

योजना बनी किसलिए

11 से 14 साल की वो लड़कियां जो फिलहाल स्कूल नहीं जा रहीं, इस योजना का पूरा फोकस उन्हीं पर है। सिर्फ राशन देकर छोड़ नहीं दिया जाता, बल्कि स्किल ट्रेनिंग भी साथ में दी जाती है, ताकि लड़कियां आत्मनिर्भर बन सकें। ये केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों 50:50 के अनुपात में फंडिंग करती हैं।

इस योजना के पीछे का सोच सिर्फ पोषण तक सीमित नहीं। मकसद है किशोरियों के आत्म-विकास और सशक्तिकरण में मदद करना, उनकी पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति सुधारना, स्वास्थ्य-स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना। जो लड़कियां स्कूल छोड़ चुकी हैं, उन्हें फिर से पढ़ाई की मुख्यधारा में लाने या फिर वैकल्पिक शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश भी इसमें शामिल है। घर से जुड़े हुनर और लाइफ स्किल्स सिखाना भी इसका हिस्सा है, और साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अस्पताल, डाकघर, बैंक, पुलिस स्टेशन जैसी सार्वजनिक सेवाओं के बारे में जानकारी और मार्गदर्शन भी दिया जाता है।

क्या क्या मिलता है इस योजना में

लाभार्थियों को स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग के साथ साथ मासिक टेक होम राशन यानी THR मिलता है। इसे दो हिस्सों में समझा जा सकता है, पौष्टिक और गैर-पौष्टिक।

पौष्टिक वस्तुओं में चावल, अंडे और सोयाबीन दिया जाता है, वो भी हर महीने 25 दिनों के लिए। ये कोई एक बार की सुविधा नहीं, बल्कि नियमित रूप से चलने वाला सपोर्ट है।

गैर-पौष्टिक हिस्से में आयरन फॉलिक एसिड सप्लीमेंट, पूरी हेल्थ चेकअप और रेफरल सेवाएं, स्वास्थ्य-पोषण से जुड़ी शिक्षा, स्कूल से बाहर की लड़कियों को दोबारा शिक्षा प्रणाली में लाने की कोशिश, लाइफ स्किल एजुकेशन, घर संभालने की ट्रेनिंग और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंचने के लिए काउंसलिंग जैसी चीज़ें शामिल हैं। यानी सिर्फ खाना नहीं, बल्कि पूरी तरह से एक लड़की के जीवन को बेहतर बनाने की कोशिश इस योजना में झलकती है।

कौन इसका फायदा उठा सकती है

पात्रता की शर्तें ज्यादा नहीं हैं, सिर्फ तीन।

  • लाभार्थी बिहार की निवासी होनी चाहिए
  • उम्र 11 से 14 वर्ष के बीच हो
  • लड़की फिलहाल स्कूल न जा रही हो

तीसरी शर्त पर ध्यान दीजिए, ये योजना खासतौर पर स्कूल से बाहर की लड़कियों के लिए है। जो लड़कियां पहले से स्कूल जा रही हैं, उनके लिए इस स्कीम में कोई प्रावधान नहीं बताया गया।

किन दस्तावेज़ों की जरूरत होगी

  • पहचान का प्रमाण, यानी आधार कार्ड
  • उम्र का प्रमाण, यानी जन्म प्रमाण पत्र
  • पते का प्रमाण
  • जरूरत पड़ने पर कोई अतिरिक्त दस्तावेज़

दस्तावेज़ों की लिस्ट यहां छोटी और सीधी है, कोई भारी भरकम प्रक्रिया नहीं।

कैसे शामिल हों इस योजना में

आवेदन जैसा कोई फॉर्मल फॉर्मैट यहां नहीं है। लाभार्थी को बस अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र पर जाकर अपना नाम पंजीकृत कराना होता है। यानी कोई पोर्टल, कोई ऑनलाइन प्रोसेस नहीं, सीधे आंगनवाड़ी केंद्र ही इस योजना का मुख्य दरवाज़ा है।

अगर कोई शिकायत हो तो कहां जाएं

इस योजना में शिकायत निवारण का दायरा काफी विस्तृत रखा गया है। उप-मंडल स्तर पर लोक शिकायत निवारण अधिकारी, जिला स्तर पर जिला लोक शिकायत निवारण अधिकारी और विभाग स्तर पर विभागीय लोक शिकायत निवारण अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

इसके अलावा परियोजना स्तर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी या जिला अधिकारी, मंडल स्तर पर मंडल आयुक्त और निदेशक ICDS के पास भी मुद्दे उठाए जा सकते हैं। अगर मामला और ऊपर ले जाना हो, तो राज्य स्तर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या समाज कल्याण विभाग के सचिव तक भी शिकायत पहुंचाई जा सकती है। शिकायत लिखित रूप में या टेलीफोन पर, दोनों तरीकों से भेजी जा सकती है।

स्रोत और संदर्भ:-

योजना गाइडलाइन

सरकारी पोर्टल

योजना विवरण

FAQs:-

इस योजना के लिए कौन पात्र है?
बिहार की निवासी 11 से 14 वर्ष की ऐसी किशोरियां, जो वर्तमान में स्कूल नहीं जा रही हैं, इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र हैं।
इस योजना के तहत क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
योजना के अंतर्गत हर महीने टेक होम राशन, आयरन एवं फॉलिक एसिड की गोलियां, स्वास्थ्य जांच, कौशल विकास प्रशिक्षण तथा शिक्षा से संबंधित सहायता प्रदान की जाती है।
टेक होम राशन कैसे मिलता है?
आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रत्येक महीने 25 दिनों के लिए चावल, अंडे, सोयाबीन सहित अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री वितरित की जाती है।
इस योजना का उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के स्तर में सुधार करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक बनाना है।
यह योजना स्कूल से बाहर की लड़कियों की कैसे मदद करती है?
योजना के माध्यम से किशोरियों को दोबारा औपचारिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। यदि यह संभव न हो, तो उन्हें वैकल्पिक शिक्षा और कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।
इस योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
आवेदक को अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र पर जाकर नाम पंजीकृत कराना होता है। इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
इस योजना का वित्तपोषण कैसे किया जाता है?
इस योजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा 50:50 के अनुपात में किया जाता है।
क्या 15 वर्ष या उससे अधिक आयु की लड़कियां इस योजना का लाभ ले सकती हैं?
नहीं, यह योजना केवल 11 से 14 वर्ष की आयु की पात्र किशोरियों के लिए है।
अगर योजना में शामिल होने के बाद कोई लड़की स्कूल जाना शुरू कर दे तो क्या होगा?
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इस स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं बताया गया है।
इस योजना को कौन लागू करता है?
यह योजना आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) द्वारा लागू की जाती है।
योजना से जुड़ी शिकायत कहां दर्ज कर सकते हैं?
शिकायत उप-मंडल, जिला और विभाग स्तर के लोक शिकायत निवारण अधिकारियों के पास दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा ICDS के संबंधित अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है।

Vivek

Experience:
Covers the Indian Stock Market, IPOs, Mutual Funds, Corporate Announcements, and Business News.
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