स्कूल जाने वाली छात्राओं को हर महीने मिलेगा ₹50, अरुणाचल प्रदेश की स्वास्थ्य और स्वच्छता योजना

On: August 26, 2026 5:42 PM

मासिक धर्म के दौरान स्कूल जाना छोड़ देना, ये समस्या आज भी कई इलाकों में लड़कियों की पढ़ाई रोकने की एक बड़ी वजह बनती है। अरुणाचल प्रदेश सरकार के स्कूली शिक्षा विभाग ने 2013 में इसी समस्या को हल करने के लिए एक योजना शुरू की, छात्रा स्वास्थ्य और स्वच्छता योजना, जो सीधे तौर पर लड़कियों की मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी है।

योजना है क्या

मकसद साफ है, मासिक धर्म के दौरान लड़कियों की स्कूल में उपस्थिति बनाए रखना और उन्हें पढ़ाई से दूर होने से रोकना। इसके साथ साथ किशोर लड़कियों में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी इस योजना का हिस्सा है।

एक जरूरी बात यहां समझ लीजिए, ये योजना सिर्फ उन्हीं संस्थानों में लागू है जो पूरी तरह राज्य सरकार द्वारा संचालित हैं, या फिर सरकार से सहायता प्राप्त स्कूल हैं। छठी से बारहवीं कक्षा तक की छात्राएं ही इसमें कवर होती हैं।

सैनिटरी नैपकिन की आपूर्ति एक विकेंद्रीकृत तरीके से होती है, यानी ये किसी एक केंद्रीय सिस्टम से नहीं आती। ये लाभार्थियों के खाते में सीधे नकद ट्रांसफर के जरिए, स्कूल प्रबंधन के जरिए, या फिर जिला स्तर पर केंद्रीय खरीद के जरिए हो सकती है। इसके बाद असली वितरण स्कूल स्तर पर ही किया जाता है।

कितना लाभ मिलेगा

सभी सरकारी स्कूलों में हर छात्रा को DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए ₹50 प्रति माह मिलता है। ये राशि महीने दर महीने अलग से नहीं आती, बल्कि पूरे साल की जमा राशि एक साथ लाभार्थी के खाते में डाल दी जाती है।

कौन इसका फायदा उठा सकती है

पात्रता की शर्तें इस प्रकार हैं।

  • लाभार्थी छात्रा हो
  • लाभार्थी छठी से बारहवीं कक्षा में पढ़ रही हो
  • लाभार्थी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में नामांकित हो
  • लाभार्थी अरुणाचल प्रदेश की निवासी हो

यहां साफ तौर पर समझ लीजिए, प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं इस योजना के दायरे से बाहर हैं, चाहे वो अरुणाचल प्रदेश की ही निवासी क्यों न हों। सिर्फ सरकारी या सरकार से सहायता प्राप्त स्कूल की छात्राएं ही इसका फायदा उठा सकती हैं।

किन दस्तावेज़ों की जरूरत होगी

  1. स्कूल पहचान पत्र, सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में एडमिशन का प्रमाण
  2. आधार कार्ड
  3. आवेदक या संबंधित छात्रा का बैंक विवरण

आवेदन कैसे करें

यहां सबसे राहत की बात यही है, इस योजना के लिए कोई अलग से आवेदन पत्र भरने की जरूरत ही नहीं है। छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन उनके स्कूल के जरिए ही मिल जाते हैं, सीधा और आसान प्रोसेस।

अगर किसी छात्रा को इस योजना से जुड़ी कोई जानकारी चाहिए या कोई दिक्कत आए, तो वो अपने संबंधित जिले में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशक से भी संपर्क कर सकती है। यानी स्कूल के अलावा एक और रास्ता भी खुला है, जिला स्तर के अधिकारी से सीधे बात करने का।

स्रोत और संदर्भ:-

MyScheme

योजना से जुड़े आधिकारिक दिशा निर्देश

FAQs:-

यह योजना कब शुरू की गई थी?
इस योजना की शुरुआत वर्ष 2013 में की गई थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य मासिक धर्म के दौरान छात्राओं की स्कूल उपस्थिति बनाए रखना और मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
इस योजना को किस विभाग ने शुरू किया था?
अरुणाचल प्रदेश सरकार के स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा इस योजना की शुरुआत की गई थी।
इस योजना के तहत क्या लाभ मिलता है?
पात्र छात्राओं को ₹50 प्रति माह की सहायता DBT के माध्यम से दी जाती है। पूरे साल की राशि एक साथ बैंक खाते में जमा की जाती है।
इस योजना के लिए कौन पात्र है?
छठी से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली अरुणाचल प्रदेश की निवासी छात्राएं, जो सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में नामांकित हैं, पात्र हैं।
क्या निजी स्कूलों की छात्राएं भी इसका लाभ ले सकती हैं?
नहीं, यह सुविधा केवल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए है।
क्या योजना के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता है?
नहीं, इसके लिए छात्राओं को अलग से आवेदन फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होती।
सैनिटरी नैपकिन या सहायता राशि कैसे मिलती है?
सैनिटरी नैपकिन स्कूल स्तर पर वितरित किए जा सकते हैं, जबकि निर्धारित वित्तीय सहायता DBT के जरिए सीधे छात्रा के बैंक खाते में भेजी जाती है।

Vivek

Experience:
Covers the Indian Stock Market, IPOs, Mutual Funds, Corporate Announcements, and Business News.
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